News UDI | गढ़वा : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा संचालित ‘बाल सुरक्षा योजना’ के तहत जरूरतमंद और बेसहारा बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में गढ़वा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की ओर से प्रवासी मजदूरों की मौत के बाद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे बच्चों को योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
यह पहल जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद तथा प्राधिकार की सचिव निभा रंजना लकड़ा के निर्देश पर की गई। अधिकारियों के मार्गदर्शन में पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) द्वारा जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भवनाथपुर प्रखंड के मकरी गांव निवासी स्वर्गीय विजेंद्र सिंह और राजकुमार उरांव प्रवासी मजदूर के रूप में गुजरात में ड्राइवर का काम करते थे। दुर्भाग्यवश, विजेंद्र सिंह की 31 अगस्त 2023 तथा राजकुमार उरांव की 27 सितंबर 2021 को गुजरात में ही सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।
दोनों प्रवासी मजदूरों की असमय मृत्यु के बाद उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई। घर के मुखिया के निधन के कारण बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा करने में परिवार के सदस्यों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल पर स्वर्गीय विजेंद्र सिंह के पांच नाबालिग बच्चों में से तीन तथा स्वर्गीय राजकुमार उरांव के दो बच्चों में से एक को बाल कल्याण समिति के माध्यम से अनाथ बच्चों की स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने के लिए आवेदन कराया गया। इस योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता और संरक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनके पालन-पोषण और शिक्षा में मदद मिल सके।
इस दौरान पीएलवी मुरली श्याम तिवारी, सुधीर कुमार चौबे, नरेश चौधरी, तृप्ता भानु, जितेंद्र कुमार तथा भवनाथपुर सरैया के संतोष कुमार गुप्ता मौजूद थे। सभी ने जरूरतमंद बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करने की बात कही।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की इस पहल को स्थानीय स्तर पर सराहनीय माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन बच्चों को सहारा मिलने की उम्मीद जगी है, जिन्होंने कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया है।






