News UDI | गढ़वा : बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई की जड़ें काटने और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गढ़वा इन दिनों एक्शन मोड में है। नालसा (नई दिल्ली) और झालसा (रांची) के दिशा-निर्देशों पर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष मनोज प्रसाद एवं सचिव निभा रंजना लकड़ा के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता का अलख जगाया जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, करके और मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कन्या उच्च विद्यालय, गढ़वा में विशेष विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया।
खबर 1: उत्क्रमित मध्य विद्यालय करके में ‘श्रमाधान’ और ‘स्पॉन्सरशिप’ पर चर्चा

राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय करके में आयोजित शिविर में पीएलवी टीम ने बच्चों को न केवल अपराधों से बचने बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के तरीके भी सिखाए।
- बाल विवाह और सजा : पीएलवी सुधीर कुमार चौबे ने बच्चों को बताया कि बाल विवाह न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने विस्तार से बताया कि इस कुप्रथा को बढ़ावा देने वालों और इसमें शामिल होने वाले लोगों पर कानून का डंडा कैसे चलता है।
- मजदूरों के लिए श्रमाधान एप : चूंकि क्षेत्र के अधिकांश अभिभावक श्रमिक हैं, इसलिए बच्चों को ‘श्रमाधान एप’ के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे अपने अभिभावकों का निबंधन करा सकें और सरकारी लाभ सुनिश्चित कर सकें।
- अनाथ बच्चों को सहारा : पीएलवी रविन्द्र यादव ने ‘स्पॉन्सरशिप योजना’ की महत्ता बताई, जो अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए भविष्य की नई किरण है।
उपस्थिति : इस अवसर पर प्रधानाचार्य रवींद्र प्रसाद, शिक्षक बीरबल राम, राजनारायण मिश्रा, विजय प्रसाद यादव, संजय यादव, प्रियतम कुमार रजक एवं पीएलवी सुधीर कुमार चौबे व रविन्द्र यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
खबर 2 : उत्कृष्ट कन्या उच्च विद्यालय में हुंकार- ‘शादी में शामिल होने वाले भी जाएंगे जेल’

जिला मुख्यालय स्थित मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कन्या उच्च विद्यालय में पीएलवी मुरली श्याम तिवारी और अरविंद तिवारी ने छात्राओं को कानून की ताकत से रूबरू कराया।
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 : मुरली श्याम तिवारी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम के लड़के की शादी करना कानूनन अपराध है।
- दोषियों का दायरा : उन्होंने एक कड़ा संदेश दिया कि बाल विवाह में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि बाराती, पंडित, नाई, टेंट वाले और बाजा बजाने वाले भी अपराधी माने जाएंगे। समाज के हर व्यक्ति को मिलकर इसे रोकना होगा।
- शिक्षा और सुरक्षा : शिविर में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, बाल ट्रैफिकिंग और पालन-पोषण देख-रेख अधिनियम पर भी चर्चा हुई।
- ₹4000 मासिक सहायता : गरीब, अनाथ और विधवा महिलाओं के बच्चों के लिए सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना के तहत मिलने वाली 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही DLSA द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता और आपसी समझौते से विवादों के निपटारे की जानकारी दी गई।
उपस्थिति : इस कार्यक्रम में विद्यालय की सैकड़ों छात्राएं, शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित थीं, जिन्होंने समाज सुधार का संकल्प लिया।








