News UDI | गढ़वा : प्रकृति की आराधना और अटूट आस्था का महापर्व सरहुल शनिवार को गढ़वा जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थित पुलिस केंद्र और आदिवासी सरना विकास परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में आस्था, परंपरा और आधुनिक प्रशासन का अनूठा संगम देखने को मिला। केवल शहर ही नहीं, बल्कि जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और वनांचलों में भी आदिवासी परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सखुआ के फूलों की पूजा कर नए साल का स्वागत किया।

पुलिस केंद्र में खाकी के साथ दिखा लोक संस्कृति का रंग
गढ़वा पुलिस केंद्र स्थित सरना स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक (SP) अमन कुमार की उपस्थिति ने जवानों और उनके परिजनों का उत्साह दोगुना कर दिया।
- पारंपरिक पूजा : पुलिस परिवार के सदस्यों ने पूरी श्रद्धा के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की।
- एकता का संदेश : इस दौरान SP अमन कुमार, SDO संजय कुमार, एएसपी (अभियान) राहुल देव बड़ाइक, डीएसपी मुख्यालय यशोधरा और गढ़वा थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी सहित कई अधिकारियों ने जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर पारंपरिक नृत्य किया।
- पूरा पुलिस केंद्र परिसर मांदर की गूंज और पारंपरिक गीतों से सराबोर रहा, जो सामाजिक समरसता की एक मिसाल पेश कर रहा था।
सरना विकास परिषद के कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब : मांदर बजाते दिखे SDO
आदिवासी सरना विकास परिषद द्वारा आयोजित भव्य पूजन और सांस्कृतिक समारोह में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजय कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
- प्रशासनिक जुड़ाव : नगाड़ों और मांदर की थाप पर एसडीएम संजय कुमार खुद को रोक नहीं पाए और पाहन व ग्रामीणों के साथ जमकर थिरके। उन्होंने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को नमन किया।
- प्रकृति और मानव का संगम : अपने संबोधन में SDO ने कहा कि सरहुल केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन का संरक्षक रहा है।

“पर्यावरण संरक्षण हमारी सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है।” – संजय कुमार, SDO गढ़वा






