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गढ़वा : करकोमा के पूर्व मुखिया व वरिष्ठ समाजसेवी वाल्मीकि चौबे का निधन, जेपी आंदोलन के रहे थे प्रखर सिपाही

On: March 18, 2026 9:25 PM
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News UDI | गढ़वा : गढ़वा जिले के सामाजिक और राजनीतिक क्षितिज का एक देदीप्यमान सितारा बुधवार को अस्त हो गया। मेराल थाना क्षेत्र के देवगाना गांव निवासी, करकोमा पंचायत के पूर्व मुखिया और प्रखर समाजसेवी वाल्मीकि चौबे का 81 वर्ष की आयु में उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। बुधवार दोपहर 1:45 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

एक युग का अंत : सोशलिस्ट विचारधारा के थे मजबूत स्तंभ

वाल्मीकि चौबे महज एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उनकी पहचान एक तेज-तर्रार सोशलिस्ट नेता के रूप में थी। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और अन्याय के खिलाफ सदैव मुखर रहे।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी

कानून की गहरी समझ रखने वाले वाल्मीकि चौबे अपनी विद्वत्ता के लिए पूरे जिले में विख्यात थे। वे हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं पर समान पकड़ रखते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनका धाराप्रवाह व्याख्यान था; जब वे बोलना शुरू करते थे, तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। मृदुभाषी स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण हर वर्ग के लोग उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे।

राजनीतिक सफरनामा

  • 1970 : पहली बार करकोमा पंचायत के मुखिया निर्वाचित हुए।
  • कार्यकाल : ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए उनका कार्यकाल आज भी मिसाल माना जाता है।
  • सक्रियता : मुखिया पद से हटने के बाद भी वे विभिन्न राजनीतिक दलों के माध्यम से समाज सेवा में डटे रहे।

अंतिम विदाई : दानरो नदी के तट पर हुआ संस्कार

उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पैतृक गांव देवगाना में अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बुधवार को ही गांव स्थित दानरो नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मुखिया को मुखाग्नि : उनके ज्येष्ठ पुत्र ओमप्रकाश चौबे ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस अवसर पर छोटे पुत्र प्रेम प्रकाश चौबे सहित सुरेंद्र चौबे, विक्रमादित्य चौबे, देवंत चौबे, उदय चौबे, अशर्फी चौबे, ओमकार चौबे, विनोद चौबे, शशिकांत चौबे, ध्रुव शंकर चौबे, प्रमोद चौबे, उमेश चौबे, कृपाशंकर चौबे, अवधेश चौबे, कुलवंत चौबे, संतोष कुमार चौबे और मुखिया अनिल चौधरी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।

“वाल्मीकि चौबे जी का निधन जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और अंतिम समय तक सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।”

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