मझिआंव नगर पंचायत में तैनात थे दो-दो इंजीनियर, फिर भी अनुभवी की ‘रट’ लगाकर डीसी को अंधेरे में रखा; संदीप कुमार की विवादित एंट्री पर लगा ब्रेक।
| विवरण | स्थिति |
| प्रस्तावित नाम | कनीय अभियंता संदीप कुमार |
| ईओ का दावा | अनुभवी इंजीनियर की कमी |
| कड़वा सच | दो इंजीनियर पहले से ही तैनात थे |
| डीसी का एक्शन | प्रतिनियुक्ति रद्द + लिखित चेतावनी |
| विभागीय नियम | मझिआंव में मात्र 2 पद ही सृजित हैं |
News UDI | गढ़वा : मझिआंव नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) शैलेश कुमार द्वारा उपायुक्त (DC) दिनेश कुमार यादव को ‘गुमराह’ करने की कोशिश भारी पड़ गई है। कनीय अभियंता संदीप कुमार की प्रतिनियुक्ति के नाम पर तथ्यों को छिपाने के खेल का खुलासा होते ही डीसी ने सख्त तेवर दिखाए हैं। उपायुक्त ने न केवल प्रतिनियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया है, बल्कि ईओ को लिखित रूप में अल्टीमेटम भी थमा दिया है।
सत्ता और रसूख का ‘मृगतृष्णा’ खेल?
पूरा मामला संदीप कुमार (अनुबंध कनीय अभियंता, गढ़वा नगर परिषद) की मझिआंव में एंट्री से जुड़ा है। ईओ शैलेश कुमार ने ‘विकास कार्यों में तेजी’ का हवाला देकर एक अनुभवी इंजीनियर की मांग की थी। उनकी सिफारिश पर उपायुक्त कार्यालय ने संदीप कुमार को गढ़वा के साथ मझिआंव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। लेकिन असली खेल तब खुला जब यह पता चला कि मझिआंव में पहले से ही संदीप यादव और उमाकांत रवि के रूप में दो कनीय अभियंता मौजूद हैं।
विभागीय नियम की धज्जियां: नगर विकास एवं आवास विभाग के मानक (अधिसूचना-4789) के अनुसार मझिआंव के लिए मात्र दो पद ही सृजित हैं। ऐसे में तीसरे अभियंता की मांग करना सीधे तौर पर प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन और उपायुक्त को दिग्भ्रमित करने की साजिश थी।
डीसी की सख्त चेतावनी: ‘अब दोबारा न हो ऐसी हिमाकत’
उपायुक्त ने अपने पत्र (ज्ञापांक-30/2026) में ईओ की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि भविष्य में किसी कर्मी की तैनाती या प्रतिनियुक्ति के लिए अगर भ्रामक प्रतिवेदन दिया गया, तो इसे अनुशासनहीनता मानकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
पुराना ‘खिलाड़ी’, वही कहानी!
संदीप कुमार की प्रतिनियुक्ति का यह कोई पहला विवाद नहीं है। साल 2023-24 में भी इसी तरह का एक ‘अजीबोगरीब’ मामला सामने आया था। तब तत्कालीन ईओ सुशील कुमार ने खुद को ही पत्र लिखा और मझिआंव के ईओ के तौर पर गढ़वा के ईओ (स्वयं) से संदीप की मांग की और एक ही दिन में मंजूरी भी दे दी। खुद ही प्रस्तावक और खुद ही मंजूर करने वाले इस अजब-गजब मामले ने रांची तक हलचल मचा दी थी।






