News UDI | गढ़वा : गढ़वा जिले के धुरकी थाना क्षेत्र में अवैध बालू उत्खनन और परिवहन का काला कारोबार अब निर्दोषों के खून से सनने लगा है। बुधवार रात करीब 10 बजे अंबाखोरेया पंचायत के बरसोती गांव में बालू माफियाओं के एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने मोटरसाइकिल सवार दो लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण हादसे में भंडार गांव निवासी विजय लोहरा (पिता- सेवक लोहरा) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके साथी कृष्णा कोरवा गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना का विवरण : मौत बनकर दौड़ा ‘नाबालिग’ चालक
जानकारी के अनुसार, कनहर नदी के प्रतिबंधित घाट से अवैध बालू लादकर एक ट्रैक्टर अत्यंत तेज गति से निकल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रैक्टर को एक नाबालिग चालक चला रहा था। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण ट्रैक्टर ने बाइक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि विजय लोहरा ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। घायल कृष्णा कोरवा को स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा : टायरों की निकाली हवा

हादसे के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने मृतक के शव को सड़क पर रखकर धुरकी-नगर उंटारी मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। रात के अंधेरे में अवैध बालू ढो रहे करीब आधा दर्जन ट्रैक्टरों और एक टीपर को ग्रामीणों ने मौके पर ही घेर लिया और विरोध स्वरूप उनके टायरों की हवा निकाल दी।
प्रशासन और माफिया की मिलीभगत पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में रात के अंधेरे में बालू का यह काला खेल बेखौफ चल रहा है। ग्रामीणों ने तीखे सवाल पूछते हुए कहा :
“अगर बालू की जरूरत है, तो इसे दिन में वैध तरीके से क्यों नहीं ढोया जाता? रात में मौत बनकर दौड़ते इन ट्रैक्टरों के कारण बच्चों और आम लोगों का घर से निकलना मुहाल हो गया है।”
पुलिस की भूमिका पर संशय : मुख्य आरोपी ट्रैक्टर अब भी फरार
गुरुवार सुबह करीब 7 बजे धुरकी थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा। हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। जिस ट्रैक्टर से हादसा हुआ, वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। ग्रामीणों ने जिन अवैध बालू लदे वाहनों को रोका था, उन्हें भी सुबह तक थाने नहीं ले जाया गया, जिससे धुरकी के थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों में भारी चर्चा और आक्रोश है।
अवैध बालू खनन : पुरानी घटनाएं और अनसुनी चेतावनी
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अवैध बालू परिवहन के दौरान छत्तीसगढ़ में एक पुलिसकर्मी को ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया गया था। गढ़वा के सीमावर्ती इलाकों में बालू माफिया इतने बेखौफ हैं कि वे जान लेने से भी गुरेज नहीं करते। बड़े-बड़े हादसों और मौतों के बावजूद अवैध खनन का जारी रहना यह स्पष्ट करता है कि इस ‘खूनी खेल’ के पीछे किसी प्रभावशाली सफेदपोश का हाथ है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में केवल खानापूर्ति करता है या उन ‘बड़े हाथों’ तक भी पहुंचता है जिनकी शह पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।






