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झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मियों का हल्ला बोल : सम्मान फाउंडेशन की ‘तानाशाही’ के खिलाफ आर-पार की जंग, ठप हो सकती हैं आपातकालीन सेवाएं!

On: March 28, 2026 9:00 PM
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News UDI | राँची : झारखंड में जीवनदायिनी कही जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा के पहिए कभी भी थम सकते हैं। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ (भारतीय मजदूर संघ सम्बद्ध) ने सम्मान फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कथित शोषण और तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ और बर्खास्त कर्मियों की बहाली नहीं हुई, तो पूरे राज्य में एंबुलेंस सेवाएं ठप कर दी जाएंगी।

विवाद की जड़ : हक मांगने पर मिली ‘सेवा समाप्ति’

मामले की शुरुआत 13 मार्च 2026 को हुई, जब कर्मचारियों ने राँची के डोरंडा स्थित श्रम भवन में अपने वैधानिक अधिकारों जैसे PF, ESIC, ग्रेच्युटी और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। संघ का कहना है कि आंदोलन के दौरान भी स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं किया गया, लेकिन इसके बदले में संस्था ने कई कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के सेवा समाप्ति पत्र थमा दिए और कई को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर डराने का प्रयास किया।

108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के लोग ( फाइल फोटो)

NHM के हस्तक्षेप के बावजूद वादाखिलाफी का आरोप

संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने इस मामले को लेकर 19 मार्च को NHM के एमडी शशि प्रकाश झा से मुलाकात की थी। एमडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए NGO कोषांग को जांच के निर्देश दिए थे।

इसके बाद 23 मार्च 2026 को NHM टीम की मौजूदगी में संघ और संस्था के बीच समझौता हुआ था कि :

  1. संगठन के माध्यम से स्पष्टीकरण मिलने पर सेवा समाप्ति के आदेश वापस लिए जाएंगे।
  2. हटाए गए कर्मचारियों को तत्काल ड्यूटी पर बहाल किया जाएगा।

आरोप है कि सम्मान फाउंडेशन इस समझौते को ठेंगा दिखा रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

ज्ञापन सौंपते 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के लोग ( फाइल फोटो)

संस्था पर गंभीर आरोप : एस्मा (ESMA) का डर और जबरन तबादले

संघ ने सम्मान फाउंडेशन की कार्यशैली पर पांच गंभीर सवाल खड़े किए हैं :

  • बिना नोटिस कर्मचारियों को सस्पेंड और टर्मिनेट करना।
  • उच्च स्तरीय समझौतों की सरेआम अवहेलना।
  • कर्मचारियों को डराने के लिए कारण बताओ नोटिस का सहारा लेना।
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद एस्मा (ESMA) कानून का भय दिखाना।
  • बदले की भावना से कर्मचारियों का अनुचित जिला स्थानांतरण (Transfer) करना।

स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की गुहार, आंदोलन की चेतावनी

संघ ने माननीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सभी ‘कारण बताओ नोटिस’ और निलंबन आदेश तत्काल रद्द हों।
  • बर्खास्त कर्मचारियों की ससम्मान कार्य पर वापसी हो।
  • PF, ESIC, ग्रेच्युटी और न्यूनतम मजदूरी का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
  • पूर्व में हुए सभी समझौतों को अक्षरशः लागू किया जाए।

“हम अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। यदि श्रम विभाग की समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई और संस्था ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा, तो राज्यभर में 108 सेवाएं ठप होंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संस्था की होगी।”नीरज तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष, झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ

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