News UDI | गढ़वा : गढ़वा में रईसों के शौक और आम जनता की सुरक्षा के बीच महासंग्राम छिड़ गया है। एक डॉक्टर साहब के दो खूंखार कुत्तों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थाने और नगर परिषद से होता हुआ सीधे झारखंड के मुख्य सचिव के दरबार तक जा पहुंचा है। मामला इतना बढ़ गया है कि अब इसमें एससी-एसटी एक्ट का एंगल भी जुड़ चुका है!
क्या है पूरा मामला?
झारखंड के गढ़वा शहर की पॉश विद्या एन्क्लेव सोसाइटी इन दिनों एक अजीब और हाई-प्रोफाइल विवाद का अखाड़ा बनी हुई है। यहां रहने वाले डॉ. अशोक कुमार ने अपने घर में दो विदेशी नस्ल के कुत्ते – एक जर्मन शेफर्ड और एक लैब्राडोर – पाल रखे हैं।
सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि ये कुत्ते आए दिन परिसर में आतंक मचाते हैं। बच्चों को दौड़ाने, खुले में घूमने और लगातार भौंकने से कॉलोनी में खौफ का माहौल है। आम जनता का सड़क पर चलना तक मुहाल हो गया है। जब बच्चों के परिजनों का सब्र टूटा, तो उन्होंने इसकी शिकायत गढ़वा नगर परिषद से कर दी।
नगर परिषद का एक्शन और नोटिस
शिकायत मिलते ही हरकत में आए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार ने डॉ. अशोक कुमार को कड़े तेवर दिखाते हुए दो-दो नोटिस थमा दिए। नगर परिषद के पत्रांक 3131 में साफ तौर पर कहा गया है :
- आवासीय परिसर में कुत्तों को खुले में घुमाने से गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
- 25 सितंबर 2026 को जब नगर परिषद की टीम जांच के लिए मौके पर पहुँची, तो डॉ. अशोक कुमार ने कथित तौर पर सरकारी काम में बाधा (Obstruction of Government Work) पहुंचाई।
- इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 221 और 291 के तहत कार्रवाई का जिक्र किया गया है। (हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है)
डॉक्टर साहब का पलटवार : मामला पहुँचा मुख्य सचिव तक!
गढ़वा नगर परिषद के नोटिस से खफा डॉ. अशोक कुमार ने इसे अपना अपमान बताया है। उन्होंने इस विवाद को एक नया और सनसनीखेज मोड़ देते हुए थाना प्रभारी, पुलिस अधीक्षक (SP), उपायुक्त (DC) से लेकर सीधे झारखंड के मुख्य सचिव तक को लिखित आवेदन भेज दिया है।
डॉक्टर साहब ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने इस विवाद को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC-ST Act) के दायरे में खींच लिया है। (यह डॉक्टर की ओर से लगाया गया गंभीर आरोप है, जिसकी सत्यता जांच के बाद ही सामने आएगी)
आगे क्या?
कुत्तों के भौंकने से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी जंग का रूप ले चुका है। एक तरफ जहाँ स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा और बच्चों के खौफ को लेकर गुस्से में हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर द्वारा एससी-एसटी एक्ट का दांव खेले जाने से प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है।














