News UDI | गढ़वा : गढ़वा की सियासत में शनिवार को उस समय भूचाल आ गया, जब झारखंड के पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक मिथिलेश कुमार ठाकुर ने वर्तमान विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मिथिलेश ठाकुर ने विधायक के आपत्तिजनक बयानों को लेकर गढ़वा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए पुलिस ने कांड संख्या 283/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
क्या है विवाद की जड़?
प्राथमिकी के अनुसार, मामला 22 अप्रैल 2026 का है। आरोप है कि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने गढ़वा सदर अस्पताल के समीप एक मेडिकल दुकान के सामने प्रेस वार्ता के दौरान मिथिलेश कुमार ठाकुर के विरुद्ध मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। विधायक ने सार्वजनिक रूप से कहा था— “हमरा बेटवा भी आजकल डकैती करने मिथिलेश ठाकुर के आदमी से सीख गया… ना इसका गाँव का ठिकाना है, ना नाम का, ना बाप का ठिकाना है।” इसके अलावा विधायक ने पूर्व मंत्री पर जमीन लूट में कमीशन खाने और घूसखोरी की आदत होने जैसे गंभीर आरोप भी मढ़े थे।
मिथिलेश ठाकुर का कड़ा प्रहार : “छवि बिगाड़ने की सोची-समझी साजिश”

थाना में दर्ज आवेदन में मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि सत्येंद्र नाथ तिवारी ने जानबूझकर उनकी सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित करने के लिए ऐसे झूठे और आधारहीन बयान दिए हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि विधायक ने उन्हें अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति बताकर समाज में उनके प्रति घृणा और अविश्वास पैदा करने की आपराधिक मंशा रखी है। पूर्व मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस तरह के बयानों से उनके समर्थकों और परिजनों के बीच गलत धारणा बनी है, जिससे उन्हें अत्यधिक मानसिक पीड़ा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध इन डिजिटल साक्ष्यों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
विधायक के ‘दागी’ इतिहास का भी खुला कच्चा चिट्ठा
मिथिलेश कुमार ठाकुर ने अपनी शिकायत में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी के पुराने मुकदमों का हवाला देते हुए उन्हें आदतन अपराधी बताया है। FIR में निम्नलिखित मामलों का विशेष जिक्र किया गया है :
- अलकतरा घोटाला : CBI Special-1 सह PMLA Court, रांची में दर्ज कांड संख्या RC-14(A) 2009(R), जिसमें चार्ज फ्रेम हो चुका है।
- सांप्रदायिक दंगा : गढ़वा थाना में दंगा भड़काने से संबंधित दर्ज मामले।
- क्रिमिनल मानहानि : दो अलग-अलग मामले विचाराधीन, जिनमें कांड संख्या C 292/2022 में दोष सारांश (Substance of Accusation) सुनाया जा चुका है।
पुलिस की कार्रवाई शुरू
गढ़वा पुलिस ने कांड संख्या 283/2026 दर्ज कर जांच की कमान संभाल ली है। पुलिस अब उन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी, जो उस प्रेस वार्ता में मौजूद थे। साथ ही, आईपी एड्रेस और वीडियो अपलोडिंग टाइमिंग जैसे तकनीकी विवरण जुटाने के लिए फेसबुक और यूट्यूब को पत्राचार करने की तैयारी है।
सियासी हलचल : पूर्व मंत्री द्वारा सीधे एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद गढ़वा में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि यह कानूनी लड़ाई अब लंबे समय तक चलेगी और आने वाले चुनावों में इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।














