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सिर्फ ‘पौधारोपण’ नहीं ‘पुत्रवत संरक्षण’ का लें संकल्प : गढ़वा प्रधान जिला जज ने दिया पर्यावरण सुरक्षा का मंत्र

On: April 22, 2026 9:27 PM
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News UDI | गढ़वा : तपती धूप और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में प्रकृति को बचाने की गुहार अब हर तरफ से सुनाई दे रही है। इसी कड़ी में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में एक नई ऊर्जा और संकल्प की तस्वीर देखने को मिली। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) रांची के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों ने न केवल मिट्टी में पौधे रोपे, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास भी कराया।

“पौधा लगाना शुरुआत है, संरक्षण असली जिम्मेदारी”

कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष DLSA, गढ़वा मनोज प्रसाद ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए एक बेहद मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा :

“पौधारोपण करना महज एक रस्म नहीं, बल्कि एक जीवन की जिम्मेदारी है। लोग पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन उचित देखभाल के अभाव में वे दम तोड़ देते हैं। हमें यह समझना होगा कि पौधारोपण ही नहीं, उनका संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ता तापमान और असंतुलित होता मौसम इस बात का संकेत है कि हम प्रकृति से दूर हो गए हैं। यदि आज हम इन पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करेंगे, तो आने वाले समय में यही पेड़ हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देंगे और गिरते भू-जल स्तर को सुधारने में मदद करेंगे।

आम जनमानस से की भावुक अपील

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन के विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने इसे “भविष्य की सुरक्षा” बताते हुए कहा कि अधिक से अधिक हरियाली ही बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का एकमात्र ठोस समाधान है।

न्यायिक पदाधिकारियों ने भी बढ़ाया हाथ

इस खास मुहिम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के साथ जिला व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायिक पदाधिकारी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। सभी अधिकारियों ने न्यायालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में पौधारोपण किया और सामूहिक रूप से प्रकृति की रक्षा की शपथ ली।


प्रमुख बिंदु : क्यों जरूरी है यह पहल?

  • सामूहिक जिम्मेदारी : प्रकृति का संरक्षण किसी एक व्यक्ति या विभाग का काम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का साझा दायित्व है।
  • सजगता का संदेश : यदि आज हम जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के भीषण संकट का सामना करना पड़ेगा।
  • सार्थक पहल : न्यायिक विभाग की इस सक्रियता से समाज के अन्य वर्गों में भी पर्यावरण के प्रति सकारात्मक संदेश गया है।

निष्कर्ष : गढ़वा व्यवहार न्यायालय द्वारा की गई यह पहल बताती है कि कानून के संरक्षक अब प्रकृति के संरक्षण के लिए भी मैदान में उतर चुके हैं। यह खबर हमें याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी को भाषणों की नहीं, बल्कि रोपण और संरक्षण की जरूरत है।

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