शब्दांजलि: ‘आपसे उम्मीद रहती है, इसीलिए बताते हैं’— विनय जी के ये आखिरी शब्द अब ताउम्र कानों में गूंजेंगे
News UDI | गढ़वा : पत्रकारिता जगत से एक बेहद हृदयविदारक और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। दैनिक जागरण अखबार के गढ़वा जिला अंतर्गत मझिआंव प्रखंड के पत्रकार विनय कुमार (54 वर्ष) की अपने ही एक रिश्तेदार के घर की छत से गिर जाने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना मझिआंव नगर पंचायत के वार्ड संख्या 04 स्थित गढ़ौटा टोला में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात को घटित हुई, जिसकी जानकारी गुरुवार अलसुबह करीब पांच बजे लोगों को हुई। इस असमय और दुखद निधन की खबर मिलते ही पूरे गढ़वा और पलामू प्रमंडल के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
रात में लघुशंका के दौरान पैर फिसलने की आशंका

जानकारी के अनुसार, विनय कुमार बुधवार की रात करीब 11:30 बजे मझिआंव खुर्द स्थित अपने आवास से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर गढ़ौटा टोला निवासी अपने रिश्तेदार बिकेंद्र कुमार चंद्रवंशी के घर गए थे। गर्मी के कारण वे रात में घर की छत पर ही सो गए थे। गुरुवार की अलसुबह जब बिकेंद्र कुमार चंद्रवंशी की आंख खुली, तो उन्होंने विनय कुमार को बिस्तर पर नहीं पाया। उन्हें लगा कि शायद विनय जी सुबह जल्दी अपने घर लौट गए होंगे।
इसी बीच, घर की एक महिला सदस्य की नजर घर के बाहर नीचे जमीन पर पड़ी, जहां विनय कुमार अचेत अवस्था में गिरे हुए थे। महिला के शोर मचाने पर परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। आशंका जताई जा रही है कि देर रात या तड़के लघुशंका (यूरिन) के लिए उठने के दौरान अंधेरे या नींद में उनका पैर अचानक फिसल गया, जिससे वे सीधे छत से नीचे पथरीली जमीन पर जा गिरे। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के कारण घटनास्थल पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, परिजनों में कोहराम

इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही मझिआंव अंचल के पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) बृज कुमार पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे और मामले की गहन छानबीन की। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया।
पत्रकार विनय कुमार के आकस्मिक निधन से उनके परिवार में कोहराम मच गया है। उनकी पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलते ही मझिआंव नगर पंचायत की अध्यक्ष सुमित्रा देवी, श्री राधाकृष्ण मंदिर के महंत बाबा केशव नारायण दास सहित इलाके के कई गणमान्य लोगों, समाजसेवियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
कादल गांव से शुरू हुआ जीवन, बरवाडीह से पत्रकारिता का सफर

विनय कुमार मूल रूप से पलामू जिले के मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत कादल गांव के निवासी थे। उनके पिता गोविंद राम जी (अब स्वर्गीय) रेलवे में कार्यरत थे और उनकी पोस्टिंग बरवाडीह रेलवे स्टेशन पर थी। इसी वजह से विनय जी की प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा बरवाडीह में ही संपन्न हुई। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को अपने जीवन का ध्येय बनाया और इसकी शुरुआत भी बरवाडीह की धरती से ही की। वे कई वर्षों तक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ के लिए बरवाडीह से पत्रकारिता करते रहे।
मझिआंव में उनकी शादी होने के लगभग एक दशक बाद, अपने पिताजी के जीवनकाल में ही उन्होंने मझिआंव में अपना घर बना लिया और सपरिवार यहीं रहने लगे। वर्ष 2003 में जब ‘दैनिक जागरण’ का रांची संस्करण शुरू हुआ, तब से वे लगातार मझिआंव प्रखंड प्रतिनिधि के रूप में दैनिक जागरण से जुड़े रहे और अपनी पैनी लेखनी से क्षेत्र की समस्याओं को प्रखरता से उठाते रहे। हालांकि, वे अपने माता-पिता को हमेशा अपने साथ ही रखते थे। माता-पिता के देहावसान के बाद उन्होंने अपने पैतृक गांव कादल में भी एक घर बनवाया था, ताकि अपनी जड़ों से जुड़े रहें। वे अपने गांव के गोतिया (पाटीदार) और ग्रामीणों के हर सुख-दुख में हमेशा शरीक होने पहुंचते थे।
शुक्रवार को कोयल नदी तट पर होगी अंत्येष्टि
दिवंगत विनय कुमार अपने पीछे दो पुत्रियों, एक इकलौते पुत्र और पत्नी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। दोनों पुत्रियों का विवाह हो चुका है। पुत्र अविवाहित है और इंजीनियर है। परिजनों ने बताया कि उनका इकलौता पुत्र पुणे (महाराष्ट्र) में कार्यरत है, जो घटना की सूचना मिलने के बाद वहां से चल चुका है और गुरुवार की देर रात तक मझिआंव पहुंच जाएगा। इसके बाद, शुक्रवार की सुबह दिवंगत पत्रकार की अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और मझिआंव में कोयल नदी के तट पर स्थित श्मशान घाट पर उनकी अंत्येष्टि संपन्न होगी।
एक सहकर्मी और मित्र की ओर से भावभीनी व्यक्तिगत श्रद्धांजलि
“एक सच्चा और भरोसेमंद साथी खो दिया, यह खालीपन आजीवन सालता रहेगा…”
विनय जी का इस दुनिया से अचानक चले जाना मेरे लिए एक ऐसा व्यक्तिगत आघात है, जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है। उनसे मेरा जुड़ाव केवल एक पेशेवर सहकर्मी का नहीं, बल्कि बेहद आत्मीय था। वर्ष 2017 के दिसंबर माह में जब मैं दैनिक जागरण के गढ़वा कार्यालय में आया, तब अखबार के एक मीटिंग में हम एक दूसरे से परिचित हुए थे । लेकिन देखते ही देखते यह परिचय एक प्रगाढ़ता में बदल गयी।
उनकी सरलता और मुझ पर अटूट विश्वास का आलम यह था कि यदि कभी उनकी भेजी हुई कोई खबर अखबार में जगह नहीं पा पाती थी, तो वे इसकी चर्चा या शिकायत सीधे दैनिक जागरण के जिला प्रभारी श्री दीपक जी से नहीं करते थे। वे मुझे फोन लगाते, पूरी सहजता से चर्चा करते और अंत में हमेशा एक बात कहते जो मेरे कानों में आज भी गूंज रही है— “आपसे उम्मीद रहती है, इसीलिए आपको बताते हैं और चर्चा करते हैं।” उनका यह वाक्य मेरे लिए सिर्फ एक भरोसा नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी।
वे केवल कार्यालय या अखबार तक सीमित नहीं थे, अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं और जीवन की छोटी-बड़ी समस्याओं को भी मुझसे साझा करते थे। इहलोक से अलविदा होने की रात में 9:19 बजे मुझसे उनकी टेलीफोनिक बातचीत हुई। वही पुरानी अंदाज में उन्होंने बातें की।
यहां यह चर्चा करना समीचीन होगा कि कई बार जब मैंने उनसे अनमने ढंग से या संकोच करते हुए कोई व्यक्तिगत काम कहा, तो उन्होंने उसे सामान्य रूप से नहीं लिया, बल्कि ‘मिशन मोड’ में आकर उस काम को इतनी तत्परता से पूरा किया कि मुझे खुद अपनी उम्मीदों पर शर्मिंदगी महसूस होने लगती थी। वे हमेशा उम्मीद से कई गुना ज्यादा तत्परता दिखाते थे।
मझिआंव क्षेत्र से जुड़ा मेरा कोई भी व्यक्तिगत काम हो या अखबार से संबंधित कोई असाइनमेंट, विनय जी को भनक लगते ही उनका फोन आ जाता था। मेरे मझिआंव पहुंचने से पहले ही वे कई बार कॉल करके पूछते— “उपाध्याय जी, कितनी देर में पहुंच रहे हैं? मैं आपका कहां इंतजार करूं?” ऐसा निश्छल और गहरा लगाव आज के समय में दुर्लभ है। वे अक्सर सामाजिक कार्यों को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराने और समाज के किसी अंतिम पायदान के जरूरतमंद व्यक्ति को मदद पहुंचाने के लिए ही मुझसे पैरवी करते थे।
उनका इस तरह इहलोक से अचानक विदा हो जाना एक ऐसा खालीपन दे गया है, जो मुझे आजीवन सालता रहेगा। इस मतलबी दुनिया में आपको पद, प्रतिष्ठा और काम करने वाले बहुत मिल सकते हैं, लेकिन निस्वार्थ भाव से आप पर इतना गहरा और अटूट भरोसा करने वाले इंसान बहुत कम मिलते हैं।
विनय जी, आप वैचारिक रूप से और अपनी यादों के रूप में हमेशा मेरे भीतर जीवित रहेंगे। ईश्वर आपकी पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह वज्रपात सहने की शक्ति दें। विनम्र श्रद्धांजलि!
– अंजनी कुमार उपाध्याय (पत्रकार)














