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लापरवाही की भेंट चढ़ी प्रसूता, गुस्साए ग्रामीणों ने सिविल सर्जन को बंधक बनाकर कराया फैसला

On: July 7, 2026 12:56 AM
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News UDI | गढ़वा : गढ़वा जिले के डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद शर्मनाक और दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत से गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सोमवार को अस्पताल परिसर में शव रखकर जमकर हंगामा किया और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुआवजे और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

तीन घंटे तक बहता रहा खून, नर्स ने डॉक्टर की जगह सफाईकर्मी को बुलाया

​मृतका कमला कुमारी (पति सोनू कुमार कुशवाहा) को 4 जुलाई की रात करीब साढ़े आठ बजे प्रसव के लिए डंडई सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भोर में नर्स सोनी कुमारी ने प्रसव कराया, जिसमें महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। आरोप है कि प्रसव के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) शुरू हो गया।

​हद तो तब हो गई जब संबंधित नर्स ने किसी डॉक्टर या वरिष्ठ स्टाफ को बुलाने के बजाय सफाईकर्मी मानमती देवी को बुला लिया। प्रसव के बाद करीब साढ़े तीन घंटे तक महिला का खून बहता रहा, लेकिन न तो उसे नियंत्रित किया गया और न ही समय पर रेफर किया गया।

अस्पताल में नहीं मिली एम्बुलेंस, निजी अस्पतालों ने वसूले पैसे

​परिजनों का कहना है कि जब स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब उन्हें बाहर ले जाने को कहा गया। सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण परिजन निजी वाहन से महिला को गढ़वा के एक निजी अस्पताल (एमजीएम) ले गए। वहां इलाज के नाम पर 44 हजार रुपये वसूले गए और तीन यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। स्थिति में सुधार न होने पर वहां से भी उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन उसे मेदिनीनगर के नारायणा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और महिला ने दम तोड़ दिया।

ठोस आश्वासन के लिए सिविल सर्जन को बनाया बंधक

​सोमवार सुबह जब परिजन शव लेकर वापस डंडई स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो मामला गरमा गया। सबसे पहले मेराल सीएचसी प्रभारी डॉ. वीरेंद्र कुमार पहुंचे, लेकिन परिजन उनके आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जे. एफ. कनेडी को मौके पर बुलाने की मांग की।

​दोपहर साढ़े तीन बजे जब सिविल सर्जन घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद ठोस लिखित आश्वासन न मिलने तक आक्रोशित भीड़ ने सिविल सर्जन तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अस्पताल परिसर में ही बंधक बना लिया। सुबह से लेकर शाम लगभग चार बजे तक अस्पताल परिसर रणक्षेत्र बना रहा।

बीडीओ की पहल पर समाप्त हुआ धरना

​मामले को बढ़ता देख प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) देवलाल करमाली मौके पर पहुंचे। उनकी मध्यस्थता और सिविल सर्जन द्वारा पीड़ित परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्स के माध्यम से सफाई कर्मी की नौकरी दिलाने, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और निजी अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई करने के लिखित आश्वासन के बाद ही शाम को प्रदर्शन समाप्त हो सका।

​इस दौरान पूर्व विधायक प्रतिनिधि दिनेश राम, जिला परिषद सदस्य मोहन पासवान, प्रमुख प्रतिनिधि रामाशीष प्रसाद, भाजपा नेत्री अनीता गुप्ता सहित भारी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न दलों के नेता उपस्थित थे।

आधिकारिक पक्ष:

​”ग्रामीणों को व्यवस्था में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। पीड़ित परिजन के एक सदस्य को आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी दिलाने तथा मामले की जांच कर दोषियों और निजी अस्पताल पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। मरीजों को कमीशन के लिए निजी अस्पताल भेजने के आरोप बेहद गंभीर हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित नर्स व कर्मियों पर सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई होगी।”

— डॉ. जे. एफ. कनेडी, सिविल सर्जन, गढ़वा

Chinmay bhardwaj

Chinmay Bhardwaj is a journalist at News UDI covering local news from Garhwa and nearby areas of Jharkhand.

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