News UDI | गढ़वा : गढ़वा शहर की सड़कों पर गंदगी फैलाने और खुले में पशु-पक्षियों का वध करने वाले दुकानदारों पर अब प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) संजय कुमार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गढ़वा नगर परिषद और मझिआंव नगर पंचायत को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सुधार नहीं दिखा, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सार्वजनिक स्थानों पर वध ‘पब्लिक न्यूसेंस’, लगेगी धारा 152
एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सड़कों पर खुले में मांस, मछली और मुर्गे की बिक्री के साथ-साथ पशुओं का वध करना ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जनता के लिए व्यवधान) का विषय है। उन्होंने निर्देश दिया कि :
- आगामी एक सप्ताह के भीतर खुले में वध और अवशेष फेंकने पर पूर्णतः रोक लगाई जाए।
- यदि अगले एक माह में अपेक्षित सुधार नहीं होता है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
मझिआंव मोड़ पर औचक निरीक्षण : दिखी भारी गंदगी
निर्देश जारी करने के साथ ही एसडीएम ने खुद धरातल पर उतरकर स्थिति का जायजा लिया। नगर प्रबंधक, स्वच्छता पर्यवेक्षक और राजस्व कर्मियों के साथ उन्होंने मझिआंव मोड़ स्थित आधा दर्जन मांस की दुकानों का औचक निरीक्षण किया।
“निरीक्षण के दौरान स्थिति काफी भयावह पाई गई। दुकानों के बाहर सड़कों पर भारी मात्रा में मुर्गियों के पंख, पंजे और खून फैला हुआ था। खुले में हो रहे वध से आम नागरिकों को गंभीर असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा है।” – संजय कुमार, एसडीएम
अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर, रिपोर्ट तलब
एसडीएम ने केवल सफाई पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि इन दुकानों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने अंचल अधिकारी (CO), गढ़वा को निर्देश दिया है कि इन दुकानों के भूमि स्वामित्व की जाँच कर तत्काल प्रतिवेदन (Report) सौंपें।
- यदि दुकानें सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हैं, तो उन पर भूमि अतिक्रमण वाद चलाया जाएगा।
- नगर परिषद के समन्वय से ऐसी अवैध दुकानों को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
धार्मिक स्थलों और स्कूलों के पास की दुकानें होंगी बंद
प्रशासन ने नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे शहर के मुख्य चौराहों, मंदिरों, पूजा स्थलों और विद्यालयों के आसपास संचालित दुकानों की पहचान करें। इन दुकानों को या तो नियमानुसार पूरी तरह व्यवस्थित और विनियमित किया जाए, या फिर इन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
लापरवाह कर्मियों पर भी गिरेगी गाज
इस बार प्रशासन केवल दुकानदारों तक ही सीमित नहीं है। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि एक महीने के भीतर संतोषजनक सुधार नहीं दिखता है, तो न केवल दुकान संचालकों पर बल्कि नगर निकाय के संबंधित कर्मियों पर भी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।














