News UDI | गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले ने न्याय के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड स्तर पर मामलों का निष्पादन करते हुए गढ़वा ने सफलता का नया इतिहास लिख दिया। जिला व्यवहार न्यायालय गढ़वा और अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय नगर ऊंटारी में एक ही दिन के भीतर 1 लाख 39 हजार 439 मामलों का निपटारा किया गया, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।
न्याय की चौखट पर हुआ त्वरित समाधान
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के निर्देश पर आयोजित इस लोक अदालत का उद्देश्य आम जनता को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन ऑनलाइन माध्यम से न्यायमूर्ति झारखंड उच्च न्यायालय सह झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण रांची के अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद ने किया, जिसमें न्यायपालिका और प्रशासन के आला अधिकारी शामिल हुए।
15 पीठों ने संभाली कमान

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने जानकारी दी कि मुकदमों के बोझ को कम करने और त्वरित निष्पादन के लिए कुल 15 अलग-अलग पीठों (Benches) का गठन किया गया था। इन पीठों में आपसी सहमति के आधार पर वर्षों से लंबित मामलों को सुलझाया गया।
इन मामलों का हुआ प्रमुखता से निपटारा:
- बैंक ऋण विवाद : 156 मामले
- बिजली विभाग के मामले : 295 मामले
- आपराधिक शमनीय मामले : 205 मामले
- कुटुंब न्यायालय (पारिवारिक विवाद) : 28 मामले
- मोटर वाहन अधिनियम : 03 मामले
इसके अतिरिक्त स्थायी लोक अदालत और अन्य सुलहनीय प्रकृति के हजारों दीवानी एवं राजस्व मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर राजस्व की वसूली भी की गई।
सामाजिक सरोकार : दिव्यांगों को मिला सहारा
न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ लोक अदालत में सामाजिक सरोकार की झलक भी देखने को मिली। इस अवसर पर 10 दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल प्रदान की गई, जिससे उनके जीवन की राह आसान हो सके।
उपस्थिति और सहयोग

इस ऐतिहासिक सफलता के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष DLSA गढ़वा मनोज प्रसाद, उपायुक्त अनन्य मित्तल, पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर, और प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज चंद्र झा सहित जिले के तमाम न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
न्यायालय कर्मियों, पैनल अधिवक्ताओं, पीएलवी (PLV), प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया, जिससे हजारों परिवारों को कानूनी उलझनों से मुक्ति मिली।
निष्कर्ष : गढ़वा की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि प्रशासन और न्यायपालिका एकजुट होकर प्रयास करें, तो न्याय की पहुंच हर अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा सकती है।














