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झारखंड स्वास्थ्य सेवा में लगा रहा लंबी छलांग : देश का तीसरा अग्रणी राज्य बना; मातृ-शिशु मृत्यु दर पर ACS अजय कुमार सिंह का ‘कड़ा’ एक्शन प्लान

On: April 2, 2026 1:08 PM
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News UDI | रांची : झारखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश भर में अपनी धमक दिखाई है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन में झारखंड अब देश का तीसरा अग्रणी राज्य बन गया है। इस बड़ी कामयाबी के साथ-साथ राज्य सरकार अब मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए युद्ध स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है।

नेपाल हाउस स्थित मंत्रालय में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का बारीकी से विश्लेषण किया गया।


मातृ मृत्यु दर पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 100% रिपोर्टिंग का लक्ष्य

बैठक में मातृ मृत्यु की स्थिति और उसकी रिपोर्टिंग प्रक्रिया की कड़ी समीक्षा की गई।

  • सराहनीय प्रदर्शन : खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़, साहिबगंज और सिमडेगा जिलों ने HMIS पोर्टल पर 100% रिपोर्टिंग सुनिश्चित की है।
  • लक्ष्य से आगे : बोकारो, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, रांची और पश्चिम सिंहभूम जिलों ने निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक रिपोर्टिंग दर्ज की है।
  • ACS का निर्देश : जिन जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है, उन्हें रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और सटीकता में तुरंत सुधार लाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब हर मातृ मृत्यु मामले की ‘वर्बल ऑटोप्सी’ कराना अनिवार्य होगा।

मौत के कारणों का चौंकाने वाला विश्लेषण

समीक्षा में सामने आया कि मातृ मृत्यु के पीछे तीन सबसे बड़े कारण हैं :

  1. अत्यधिक रक्तस्राव (PPH): 15.5% मामलों में मौत की वजह।
  2. उच्च रक्तचाप (Eclampsia): 12.5% मामलों के लिए जिम्मेदार।
  3. संक्रमण (Sepsis): 6.9% मामलों का कारण।

शिशु मृत्यु दर पर लगाम : बेबी वार्मर और ट्रेनिंग पर जोर

शिशु मृत्यु के कारणों में सेप्सिस, सांस की समस्या, निमोनिया और प्री-मैच्योर बर्थ प्रमुख पाए गए। इसे रोकने के लिए ACS ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं :

  • सभी प्रसव संस्थानों में बेबी वार्मर मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
  • लेबर रूम की नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
  • संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए।
  • गर्भवती महिलाओं और नवजात की देखभाल के लिए IEC सामग्री के जरिए व्यापक जागरूकता फैलाई जाए।

NQAS: एक साल में 8% से 56% तक का ऐतिहासिक सफर

बैठक में एक सुखद आंकड़ा सामने आया कि मार्च 2025 तक राज्य के केवल 8% स्वास्थ्य केंद्र ही NQAS प्रमाणित थे, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 56% हो गए हैं। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 100% संस्थानों को प्रमाणित कराना है।

स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ‘बोनस’ का प्रावधान

गुणवत्ता मानक बनाए रखने के लिए सरकार वित्तीय प्रोत्साहन भी दे रही है :

  • प्रति बेड ₹10,000 सालाना प्रोत्साहन राशि (3 साल तक)।
  • इस राशि का 25% हिस्सा वहां कार्यरत डॉक्टर और कर्मियों के बीच वितरित होगा।
  • शेष 75% राशि से अस्पताल की सुविधाओं को और उन्नत बनाया जाएगा।
  • प्रमाणित संस्थानों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली राशि में 15% की बढ़ोतरी मिलेगी।

बेहतर बुनियादी ढांचा और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी

अस्पतालों में दवाओं की नियमित उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ और उन्नत जांच सुविधाओं के कारण जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्मानित किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में NHM के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, DIC डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद थे। ACS अजय कुमार सिंह और अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा खुद नियमित रूप से कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि झारखंड स्वास्थ्य के हर पैरामीटर पर नंबर-1 बन सके।

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