(Summary)
- सड़क सुरक्षा से बाल संरक्षण तक—कानून के विद्यार्थियों को न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने सिखाया न्याय की संवेदनशीलता का पाठ
- न्यायमूर्ति श्रीवास्तव का संदेश: “जिंदगी अनमोल है, नियमों का पालन करें; JJ Act के तहत बच्चों के साथ मानवीय व्यवहार हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी”
- गढ़वा में आयोजित कार्यशाला में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, जिला जज, उपायुक्त एवं एसपी ने भावी अधिवक्ताओं को दिए कानूनी एवं व्यावहारिक गुर
News UDI | गढ़वा : बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, फरठिया (गढ़वा) के विधि विभाग परिसर में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) एवं जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 (JJ Act) पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने की।
जिंदगी अनमोल है, सावधानी से वाहन चलाएँ : न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव

मुख्य अतिथि एवं झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कानून के विद्यार्थियों को न्याय के मूल भाव और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाया। सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा:
“सड़क पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतना और यातायात नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। जिंदगी बेहद अनमोल है; थोड़ी सी लापरवाही भी किसी पूरे परिवार का भविष्य और जिंदगी बदल सकती है।”
JJ Act के कानूनी प्रावधानों को रेखांकित करते हुए न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में आए बच्चों के साथ कार्रवाई के दौरान संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय व्यवहार बेहद जरूरी है। उन्होंने लॉ के छात्रों का आह्वान किया कि वे कानून की शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज के शोषित, कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम बनाएँ।
प्रशासनिक, न्यायिक एवं पुलिस प्रमुखों के विचार

१. विधिक सेवाओं की भूमिका और न्याय तक पहुँच (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद):
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गढ़वा के अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने कहा कि MACT और JJ Act के मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए सभी संस्थाओं में आपसी समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एक सफल विधि विशेषज्ञ की पहचान केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने की उसकी निष्ठा से होती है।
२. विभागों का समन्वित प्रयास समय की माँग (उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा):
उपायुक्त सह DLSA उपाध्यक्ष पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि सड़क हादसों पर रोक लगाने और पीड़ितों को तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन एवं बीमा कंपनियों का एकजुट होकर काम करना आवश्यक है। कानून का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब हर विभाग अपनी जिम्मेदारी तत्परता से निभाएगा।
३. कानून का पालन और सामूहिक जिम्मेदारी (एसपी आशुतोष शेखर):
पुलिस अधीक्षक सह DLSA सदस्य आशुतोष शेखर ने दुर्घटना के बाद पुलिस प्रक्रिया, केस डायरी और यातायात नियमों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या परिवहन विभाग का काम नहीं, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्रों से यातायात जागरूकता फैलाने की अपील की।
कार्यशाला में इन मुख्य विषयों पर हुई गहन चर्चा

- MACT के तहत प्रक्रिया: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने की कानूनी प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई, मेडिकल रिपोर्ट, कागजी औपचारिकताएँ, बीमा दावों का त्वरित निपटारा और अंतर-विभागीय समन्वय।
- JJ Act, 2015 एवं बाल अधिकार: देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों के अधिकार, उनका पुनर्वास, चाइल्ड-फ्रेंडली (बाल हितैषी) दृष्टिकोण तथा संबंधित संस्थाओं के उत्तरदायित्व। वक्ताओं ने दोहराया कि बच्चों के साथ किसी भी स्तर पर कठोरता के बजाय सम्मानजनक व संवेदनशील रवैया अपनाया जाए।
- कार्यशाला में गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार चौबे एवं लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) के सदस्य सुधीर कुमार तिवारी ने भी अपने संबोधन में मोटर वाहन अधिनियम एवं बाल अधिकार कानून के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विश्वविद्यालय परिवार एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों की गरिमामयी मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भावी अधिवक्ताओं को कानूनी धाराओं के साथ-साथ व्यावहारिक पहलुओं, विभागीय समन्वय और मानवीय न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के चेयरमैन दिनेश सिंह, कुलपति एन.के. सिंह के साथ-साथ जिले के विभिन्न न्यायिक, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में लॉ के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।














