News UDI | गढ़वा : जिले के डंडा थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय छात्रा के अपहरण और कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मुख्य आरोपी राहुल चौधरी को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अग्रिम जमानत याचिका (ABA संख्या 4156/2026) पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने मामले में सख्त रुख अपनाया। इसके बाद आरोपी की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई और अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान सूचक की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ निचली अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 84 के तहत इश्तहार और कुर्की से संबंधित आदेश 20 जुलाई को जारी हो चुका है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। वहीं, घटना के करीब चार महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पीड़िता के परिवार ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पनेरीबांध से बताई जा रही है, जहां पीड़िता रहकर पढ़ाई करती थी। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों के अनुसार, उसके पड़ोस में पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के बरांव गांव स्थित लकड़ही टोला निवासी राहुल चौधरी रहता था।
पीड़िता का आरोप है कि 3 अप्रैल को आरोपी ने हथियार दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद कथित तौर पर शादी का भरोसा देकर उसे चुप रहने को कहा गया। पीड़िता उसी शाम अपने गांव लौट गई।
4 अप्रैल को अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप
पीड़िता के अनुसार, 4 अप्रैल को उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। इसी दौरान राहुल अपने बहनोई आलोक चौधरी के साथ उसके घर पहुंचा और कथित तौर पर हथियार के बल पर उसे अगवा कर पलामू जिले के रेहला थाना क्षेत्र स्थित सिगसिगी गांव के लोहरगड़ा टोला ले गया।
आरोप है कि वहां राहुल की बहन पूजा देवी और बहनोई आलोक चौधरी की मौजूदगी में शादी की रस्म जैसा घटनाक्रम किया गया।
इसके बाद राहुल और आलोक पीड़िता को मोटरसाइकिल से लकड़ही टोला ले जाने की बात कहकर निकले। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि रास्ते में तहले नदी पुल के समीप दोनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप
पीड़िता के मुताबिक, घटना के बाद जब आरोपी उसे गांव के पास छोड़कर जाने लगे तो ग्रामीणों ने राहुल को पकड़ लिया और पुलिस को इसकी सूचना दी, जबकि आलोक वहां से फरार हो गया।
पीड़िता ने डंडा थाना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका दावा है कि उसे करीब तीन दिनों तक थाने में रखा गया, उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया गया और मामले को पुराने प्रेम प्रसंग के रूप में पेश करने के लिए बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि पुलिस ने राहुल को थाने से छोड़ दिया, जबकि उसे गढ़वा स्थित आश्रय गृह भेज दिया गया।
(इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।)
DLSA के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
बताया गया है कि गढ़वा आश्रय गृह में पीएलवी से मुलाकात के बाद पीड़िता ने 10 अप्रैल को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गढ़वा की सचिव को आवेदन देकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
इसके बाद DLSA की पहल पर 14 अप्रैल को डंडा थाना में कांड संख्या 9/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। 15 अप्रैल को पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।
परिवार का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
22 जुलाई को आरोपी के घर चिपकाया गया इश्तहार
अदालती कार्रवाई के बाद 22 जुलाई को पुलिस ने आरोपी राहुल चौधरी के घर पर इश्तहार चिपकाया। पीड़िता के परिवार का कहना है कि घटना के करीब चार महीने बाद भी आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पीड़िता और उसके परिजनों पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। पीड़िता की ओर से डीजीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाने की बात कही गई है।
अब झारखंड हाईकोर्ट से मुख्य आरोपी को अग्रिम जमानत में राहत नहीं मिलने के बाद पीड़ित परिवार को मामले में आगे सख्त कार्रवाई और न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।














