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गढ़वा सदर अस्पताल में ‘पाप’ का खेल : तिरंगे का अपमान करने वाली ANM ने अब बदला नवजात का ‘नसीब’, सरकारी रिकॉर्ड में सर्जिकल स्ट्राइक!

On: March 23, 2026 9:06 PM
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News UDI
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News UDI | गढ़वा : रसूख और पहुंच जब सिस्टम के फेफड़ों में समा जाए, तो नियम-कानून कागजों पर दम तोड़ने लगते हैं। गढ़वा सदर अस्पताल से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य विभाग की नैतिकता को आईसीयू में पहुंचा दिया है। विवादों की ‘पुरानी खिलाड़ी’ ANM तारामणि कुजूर पर आरोप है कि उन्होंने चंद रुपयों और रसूख के खातिर सरकारी दस्तावेजों के साथ ऐसी ‘काट-छांट’ की, जिससे एक नवजात बच्ची का कानूनी अस्तित्व ही बदल गया। यह मामला महज लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मानव तस्करी (Human Trafficking) और दस्तावेजों में जालसाजी का बड़ा सिंडिकेट जान पड़ता है।

रजिस्टर में ‘कलम’ का खेल : कैसे बदली गई नवजात की पहचान?

घटना की परतें तब खुलीं जब 21 फरवरी 2026 को गढ़वा शहर के पाठक मोहल्ला निवासी रूपा देवी (पत्नी लव कुमार) ने सदर अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। रूपा की पहले से तीन बेटियां थीं। रसूखदार सेटिंग के तहत, पलामू के हैदरनगर निवासी नि:संतान दंपत्ति राजू कुमार कांस्यकार और उनकी पत्नी कामिनी साहु पहले से ही वहां मौजूद थे।

सुबह की शिफ्ट वाली नर्सों ने जब रजिस्टर में नाम बदलने के नाजायज दबाव को ठुकरा दिया, तब एंट्री हुई ANM तारामणि कुजूर की। आरोप है कि तारामणि ने कानून को ठेंगे पर रखकर :

  • ओपीडी रजिस्टर और प्रसव रजिस्टर में दर्ज जैविक माता-पिता (रूपा और लव) का नाम काटकर बदल दिया।
  • जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित पिंक फॉर्म  और L-3 फॉर्मेट में हेराफेरी कर कामिनी साहु और राजू कुमार को माता-पिता बना दिया। यहां तक कि रजिस्टर में दर्ज मोबाइल नंबर को भी कांट-छांट कर बदल दिया गया।
  • बिना किसी कानूनी प्रक्रिया (Adoption Laws) के नवजात को हैदरनगर भेज दिया गया।

चोरी पकड़ी गई, जब ‘पुराने दर्द’ ने दी दस्तक

इस ‘डील’ का खुलासा तब हुआ, जब 12 मार्च को प्रसूता रूपा देवी दोबारा अस्पताल पहुंची। वह पेट दर्द और दूध सुखाने की दवा मांग रही थी। वहां मौजूद सजग नर्सों की टीम ने जब उससे पूछताछ की, तो सारा सच उगल दिया गया। इसके बाद लेबर रूम इंचार्ज ने पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट उपाधीक्षक डॉ. माहेरू यमानी को सौंप दी।

विवादों का ‘काला इतिहास’: तिरंगे का अपमान करने वाली को ‘अभयदान’ क्यों?

तारामणि कुजूर का विवादों से रिश्ता नया नहीं है। उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सवाल प्रशासन पर भी उठते हैं :

  1. साल 2021: मेराल PHC में तैनाती के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) उल्टा फहराया था
  2. दिखावे की कार्रवाई : राष्ट्र के अपमान के बाद उन्हें कांडी स्थानांतरित किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में ‘ऊंचे रसूख’ के दम पर उन्होंने वापस सदर अस्पताल में ‘मलाईदार’ प्रतिनियुक्ति (Deputation) करा ली।
  3. अनुशासनहीनता : डॉ. माहेरू यमानी द्वारा 14 मार्च को मांगे गए 24 घंटे के स्पष्टीकरण को आज 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तारामणि ने जवाब देना मुनासिब नहीं समझा।

बड़ा सवाल : आखिर कौन सा ‘अदृश्य हाथ’ इस विवादित ANM के सिर पर है, जो उसे कानून और विभाग के इकबाल से ऊपर रखता है?


अवैध लिंग परीक्षण और सिंडिकेट का अंदेशा

इस पूरे प्रकरण में एक और भयानक पहलू छिपा है। सूत्रों के अनुसार, प्रसूता रूपा देवी को प्रसव से पहले ही पता था कि उसे ‘बच्ची’ ही होगी। यह इशारा करता है कि जिले के किन अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों में लिंग परीक्षण का काला धंधा फल-फूल रहा है। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हुई, तो अस्पताल के भीतर और बाहर सक्रिय एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होना तय है।

कार्रवाई की प्रतीक्षा या रसूख के आगे समर्पण?

गढ़वा का स्वास्थ्य विभाग आज चौराहे पर खड़ा है। क्या एक ANM इतनी ताकतवर है कि वह सरकारी दस्तावेजों को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करे? क्या जिला प्रशासन इस ‘डिपुटेशन राज’ को खत्म कर कानूनी कार्रवाई करेगा, या फिर जांच की फाइलें ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएंगी?

जनता पूछ रही है: क्या गढ़वा में बेटियां और सरकारी दस्तावेज, दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं?

Chinmay bhardwaj

Chinmay Bhardwaj is a journalist at News UDI covering local news from Garhwa and nearby areas of Jharkhand.

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