General Crime Jharkhand Garhwa Ranchi Palamu Sports National International Tech Entertainment

गढ़वा में ‘वेंटिलेटर’ पर 108 एंबुलेंस सेवा : 27 में से 10 गाड़ियां बनीं कबाड़, ‘धक्का मार’ सिस्टम के भरोसे मरीजों की जान

On: May 3, 2026 10:13 PM
Follow Us:
news udi
--Advertisement Here--

News UDI | गढ़वा : झारखंड राज्य के गढ़वा थेजिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की लाइफलाइन कही जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा खुद ही बीमार पड़ गई है। सरकारी फाइलों में भले ही जिले के पास 27 एंबुलेंस का बेड़ा मौजूद हो, लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि मरीजों को अस्पताल पहुँचाने वाली ये गाड़ियां अब खुद कबाड़खानों की शोभा बढ़ा रही हैं। आलम यह है कि आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलना तो दूर, एंबुलेंस के बीच रास्ते में दम तोड़ देने के डर से ग्रामीण अब इन पर भरोसा करने से कतराने लगे हैं।

सदर अस्पताल का सबसे बुरा हाल, निजी वाहनों की चांदी

जिले के सबसे बड़े अस्पताल, सदर अस्पताल गढ़वा की स्थिति सबसे चिंतनीय है। यहाँ 4 एंबुलेंस पूरी तरह से खराब होकर सड़ रही हैं। इसके अलावा रंका, डंडई, कांडी, धुरकी, रमकंडा और भवनाथपुर जैसे क्षेत्रों में भी एक-एक एंबुलेंस पूर्ण रूप से कबाड़ में तब्दील हो चुकी है।

इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा जिले के गरीब तबके को भुगतना पड़ रहा है। गंभीर स्थिति में सरकारी एंबुलेंस न मिलने पर उन्हें निजी वाहनों को भारी-भरकम राशि चुकानी पड़ रही है, जो उनकी आर्थिक कमर तोड़ रहा है।

रेंगती गाड़ियां और ‘धक्का मार’ तकनीक

विभागीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो डराने वाली तस्वीर सामने आती है :

  • 7 एंबुलेंस ऐसी हैं, जो बमुश्किल 20 से 30 किमी की दूरी तय कर पाती हैं।
  • 8 एंबुलेंस केवल स्थानीय स्तर पर ‘किसी तरह’ रेंग रही हैं।
  • 2 एंबुलेंस (सदर अस्पताल और भंडरिया) दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद महीनों से मरम्मत की राह देख रही हैं।

जानकारों का कहना है कि यदि किसी मरीज को गंभीर स्थिति में लंबी दूरी (जैसे रांची) रेफर किया जाए, तो ये गाड़ियां रास्ते में कभी भी धोखा दे सकती हैं। ऐसी स्थिति में मरीज की जान जाना लगभग तय है।

बदहाली का गणित : एक नज़र में

श्रेणीसंख्या
पूर्ण रूप से कबाड़10
20-30 किमी चलने लायक07
सिर्फ लोकल चलने योग्य08
दुर्घटनाग्रस्त (खड़ी)02
कुल बेड़ा27

सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बढ़ता जोखिम

गढ़वा जिला भौगोलिक रूप से काफी फैला हुआ है। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक पहुंचने में घंटों लगते हैं। ऐसे में एंबुलेंस का ‘कंडीशन’ में न होना किसी आपराधिक लापरवाही से कम नहीं है। कांडी, रंका, रमना और श्री बंशीधर नगर जैसे इलाकों में मरीज भगवान भरोसे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

इस मामले में विभाग अपनी कमियां स्वीकार तो कर रहा है, लेकिन समाधान कब होगा यह अब भी सवाल है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार :

“जिले में एंबुलेंस की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। खराब गाड़ियों की सूची उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। जल्द ही नई वैकल्पिक व्यवस्था या मरम्मत का कार्य सुनिश्चित किया जाएगा।”

सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जब तक ये फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटेंगी, तब तक कितने गरीब अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?

Join WhatsApp

Join Now

YouTube

Subscribe

Join Instagram

Join Now

Also Read

बकरीद पर शांति और सौहार्द बिगाड़ने वालों की खैर नहीं, सोशल मीडिया पर रहेगी पैनी नजर, उपायुक्त ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

गढ़वा में भीषण गर्मी को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, सीएम और मुख्य सचिव के निर्देश पर प्याऊ और पेयजल व्यवस्था के कड़े आदेश

अनमैप्ड मतदाता एक सप्ताह में कराएं मैपिंग, जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने की अपील

​अपर समाहर्ता ने जनसुनवाई में सुनीं जनता की समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित निष्पादन के निर्देश

SDM संजय कुमार की औचक छापेमारी से होटल संचालकों में हड़कंप; कमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल करने पर नपेंगे रेस्टोरेंट मालिक

गढ़वा में बड़ा खुलासा : जयनगरा में मवेशी तस्करों की पिकअप ने ट्रैक्टर को मारी टक्कर, 17 क्रूरता से बंधे मवेशी बरामद; खलासी गिरफ्तार, सरगनाओं के नाम उजागर