News UDI | गढ़वा : झालसा (रांची) के निर्देशानुसार और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गढ़वा के अध्यक्ष मनोज प्रसाद एवं सचिव निभा रंजना लकड़ा के मार्गदर्शन में जिले में न्याय की मशाल घर-घर तक पहुंचाई जा रही है। इसी कड़ी में रविवार को सदर अस्पताल गढ़वा में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली की ‘मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सहायता योजना, 2024’ पर एक दिवसीय वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के उस अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाना है, जो अपनी मानसिक या बौद्धिक स्थिति के कारण अपने अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ है।
‘मनो न्याय’ केंद्र : अस्पताल से थाना तक मिलेगा न्याय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और एलएडीसीएस (LADCS) सदस्य विजय कुमार ने योजना की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए इसे एक ‘ऐतिहासिक पहल’ करार दिया। उन्होंने कहा :
“नालसा की यह योजना महज कागजी नहीं है। अब हर जिले में ‘मनो न्याय’ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। यह सेवा केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अस्पताल, पुलिस थाना और पीड़ित के घर तक भी विधिक सहायता पहुंचाई जाएगी।”
उन्होंने ‘अग्रिम निर्देश (Advance Directive)’ के महत्व को समझाते हुए बताया कि इसके तहत कोई भी व्यक्ति स्वस्थ रहते हुए यह निर्णय ले सकता है कि यदि भविष्य में उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती, तो उसका इलाज और देखभाल किस प्रकार की जाए।
चिकित्सीय परामर्श : संकोच छोड़ें, संवेदनशीलता अपनाएं
सदर अस्पताल एवं गढ़वा मंडल कारा के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार पीयूष प्रमोद ने चिकित्सा और कानून के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि जन्मजात मानसिक दिव्यांगता और बचपन में शुरू हुई मानसिक बीमारी में अंतर है। उन्होंने अपील की कि लोग सामाजिक संकोच त्याग कर समय पर डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं, सदर अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. नौशाद आलम ने बौद्धिक दिव्यांगों के प्रति समाज को अधिक संवेदनशील और व्यवहारकुशल होने की जरूरत बताई।
अनाथ बच्चों के लिए भी सहारा

कार्यक्रम का संचालन कर रहे पीएलवी मुरली श्याम तिवारी ने न केवल विधिक जानकारी साझा की, बल्कि अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए चल रही स्पांसरशिप योजना के बारे में भी विस्तार से बताया, ताकि निराश्रित बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण जागरूकता अभियान में जिले के प्रबुद्ध चिकित्सक और विधिक स्वयंसेवक शामिल हुए:
- चिकित्सा दल: डॉ. कुश कुमार, डॉ. रवि कुमार, डॉ. इकबाल अंसारी, अस्पताल प्रबंधक डॉ. विकास केसरी।
- विधिक एवं सहायक टीम: पीएलवी रविंद्र पाठक, अनुराग उपाध्याय, लव कुमार, संगीता सिन्हा, तृप्ता भानु, अरविन्द तिवारी, उमाशंकर द्विवेदी, अमरदेव चौधरी, विकास गौतम।
- सहयोगी : सदर अस्पताल के सहायक विमलेश कुमार, अरुणंजय द्विवेदी एवं अन्य।
अपील : न्याय से न रहे कोई वंचित
विजय कुमार ने अंत में जिलेवासियों से मार्मिक अपील की कि जिनके घरों या पड़ोस में कोई मानसिक बीमारी या बौद्धिक दिव्यांगता से जूझ रहा है, वे तुरंत जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गढ़वा से संपर्क करें। नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता अब हर उस व्यक्ति का हक है जो खुद अपनी आवाज नहीं उठा सकता।














