News UDI | गढ़वा : जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत रंका पंचायत में सरकारी धन की लूट का एक ऐसा सिंडिकेट सामने आया है, जिसने व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कागजों पर तो मजदूर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन हकीकत में मशीनों से काम कराकर लाखों रुपये डकारे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने अब इस ‘संगठित लूट’ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उपायुक्त (DC) से गुहार लगाई है।
फर्जीवाड़े का डिजिटल खेल: परदेस में मजदूर, पंचायत में हाजिरी!
जांच की आंच अब उन 16 डोभा निर्माण योजनाओं तक पहुँच गई है, जहाँ फर्जी डिमांड का बड़ा खेल हुआ है।
- मशीन का कमाल, मजदूरों के नाम: आरोप है कि जिन डोभा का निर्माण पहले ही मशीनों से गुपचुप तरीके से करा लिया गया था, उनकी राशि निकालने के लिए 18 और 20 फरवरी 2026 को आनन-फानन में मजदूरों की फर्जी डिमांड जेनरेट की गई।
- प्रवासी मजदूरों का नाम इस्तेमाल: भ्रष्टाचार की हद तो यह है कि जो मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में रह रहे हैं, उनके नाम पर भी मस्टर रोल भरकर पैसे निकाल लिए गए।
पुरानी योजनाओं पर ‘लीपापोती’ और जियो-टैगिंग से खिलवाड़
भ्रष्टाचार का यह खेल केवल नए कामों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार:
- पुरानी योजना, नया नाम: पहले से बन चुकी योजनाओं में केवल साफ-सफाई दिखाकर उन्हें नई योजना के रूप में पास करा लिया गया।
- जियो-टैग कहीं, काम कहीं: सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए जियो-टैगिंग वाले स्थान की जगह दूसरी जगहों पर काम दिखाकर राशि की हेराफेरी की गई है।
15वें वित्त में ‘मरम्मत’ के नाम पर मलाई
15वें वित्त आयोग की राशि का हाल भी बेहाल है। हैंडपंप और जल मीनार की मरम्मत के नाम पर बाजार दर से कहीं अधिक दाम पर सामग्री की आपूर्ति दिखाई गई है।
- कई जगहों पर नाली और चबूतरा निर्माण की लागत को कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया।
- कागजी मरम्मत: ग्रामीण बताते हैं कि धरातल पर मरम्मत का एक पत्थर तक नहीं हिला, लेकिन फाइलों में काम ‘पूर्ण’ दिखाकर पूरी राशि हड़प ली गई।
ग्रामीणों की मांग: रिकवरी के साथ हो कड़ी कानूनी कार्रवाई
गुस्साए ग्रामीणों ने उपायुक्त को सौंपे आवेदन में मांग की है कि:
- तत्काल प्रभाव से संबंधित वेंडरों और योजनाओं के भुगतान पर रोक लगाई जाए।
- मस्टर रोल, जॉब कार्ड और माप पुस्तिका (MB) की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच हो।
- दोषी पंचायत प्रतिनिधियों, बिचौलियों और विभागीय कर्मचारियों से गबन की गई राशि की रिकवरी की जाए और उन पर प्राथमिकी दर्ज हो।
बड़ा सवाल: जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाला जिला प्रशासन क्या इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों पर नकेल कस पाएगा या फिर जांच के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाएंगी?







