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गले मिले दिल, महकी फिजां : गढ़वा में अकीदत और उल्लास के साथ मनाई गई ईद-उल-फितर

On: March 21, 2026 9:18 PM
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News UDI | गढ़वा : गढ़वा जिला मुख्यालय सहित जिले के तमाम शहरी और ग्रामीण इलाकों में शनिवार को ‘ईद-उल-फितर’ का त्यौहार बेमिसाल आपसी भाईचारे, अकीदत और मुसर्रत के साथ मनाया गया। एक महीने के कठिन रोजों और इबादत के बाद आए इस ‘इनाम’ के दिन जिले की फिजां में सुबह से ही उत्सव का रंग घुला रहा। सफेद लिबास और सिर पर नमाजी टोपी पहने हजारों हाथ खुदा की बारगाह में अमन-चैन और तरक्की की दुआ के लिए एक साथ उठे।

इबादत का मंजर : सजदे में झुके हजारों सिर

सुबह की पहली किरण के साथ ही जिले की तमाम ईदगाहों, मस्जिदों और मदरसों में नमाजियों का हुजूम उमड़ पड़ा। आलम यह था कि कई जगहों पर मस्जिद परिसर कम पड़ गए और लोगों ने सड़कों व खुले मैदानों में सफें (कतारें) बिछाकर नमाज अदा की। इमामों ने तकबीरों के साथ ईद की विशेष नमाज मुकम्मल कराई। खुतबे के बाद जब सामूहिक दुआ शुरू हुई, तो पूरा माहौल रूहानी हो गया। नमाजियों ने अपने परिवार, समाज और पूरे देश में खुशहाली व शांति के लिए नम आंखों से दुआएं मांगीं।

गले मिलकर मिटाईं दूरियां : भाईचारे की मिसाल

नमाज खत्म होते ही ‘ईद मुबारक’ की सदाओं से आसमान गूंज उठा। क्या बड़े, क्या बच्चे—हर किसी ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी। यह नजारा सांप्रदायिक सौहार्द की उस मिसाल को पेश कर रहा था, जहाँ मजहबी बंदिशें टूट जाती हैं और सिर्फ इंसानियत का रिश्ता बाकी रहता है। छोटे बच्चों में ‘ईदी’ (उपहार) को लेकर गजब का उत्साह देखा गया। नए-नवेले कपड़ों में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चे बड़ों से प्यार और दुआएं बटोरते नजर आए।

दावतों का दौर : सेवइयों की मिठास और मेल-जोल

ईद के मौके पर घरों में रौनक का आलम यह था कि हर ओर पकवानों की खुशबू फैली रही। ‘मीठी ईद’ के नाम से मशहूर इस त्यौहार पर घरों में विशेष रूप से विभिन्न प्रकार की सेवइयां और लजीज व्यंजन बनाए गए।

  • सांझी संस्कृति : मुस्लिम भाइयों ने अपने गैर-मुस्लिम मित्रों और पड़ोसियों को घर बुलाकर विशेष दावतें दीं।
  • एकता का संदेश : दावतों के इन दौरों ने समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर ला दिया, जहाँ राजनीति और गिले-शिकवों को दरकिनार कर लोग एक ही दस्तरख्वान पर खुशियां बांटते दिखे।

प्रशासनिक मुस्तैदी और दान का महत्व

त्यौहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। हर प्रमुख चौराहे और नमाज स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती रही और आला अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। वहीं, मौलानाओं ने इस मौके पर ‘जकात’ और ‘फितरा’ (दान) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असली ईद वही है, जिसमें गरीबों और यतीमों को भी साथ लेकर चला जाए। दान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि समाज का कोई भी गरीब परिवार इस खुशी से वंचित न रहे।

देर शाम तक मेल-मुलाकात और मुबारकबाद का सिलसिला चलता रहा, जिसने गढ़वा की गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

Chinmay bhardwaj

Chinmay Bhardwaj is a journalist at News UDI covering local news from Garhwa and nearby areas of Jharkhand.

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