News UDI | गढ़वा : “पानी को देवता मानने वाली संस्कृति में आज जल के लिए मीलों भटकना विडंबना है। जल संरक्षण अब केवल एक चर्चा का विषय नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य शर्त है।” यह गंभीर विचार सदर एसडीएम संजय कुमार ने अपने साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के विशेष सत्र में व्यक्त किए।
विश्व जल दिवस के अवसर पर अनुमंडल कार्यालय सभागार में आयोजित इस ‘बौद्धिक मंथन’ में जिले के पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन पर्यावरण विचारक नितिन तिवारी ने किया।
नदियों के अस्तित्व पर भावुक अपील : “कल जहाँ डूबने का डर था, आज वहाँ बूंद भर पानी नहीं”
संवाद के दौरान सबसे मार्मिक पक्ष गढ़वा की जीवनरेखा मानी जाने वाली दानरो और सरस्वतिया नदी की बदहाली पर रहा।
- अनिमेष चौबे ने इन नदियों को पुनः अविरल बनाने की वकालत की।
- कमलेश सिन्हा ने अपना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जिस सरस्वतिया नदी में वे बचपन में डूबने से बचे थे, आज वह पूरी तरह सूख चुकी है।
- अमिताभ विशाल, गौतम ऋषि, आशीष कुमार, नवीन कुमार शुक्ला, ध्रुव राज और प्रवीण कुमार ने भी इन नदियों को बचाने के लिए प्रशासन से भावुक अपील की।
कंक्रीट के जंगल और भूजल स्तर पर चिंता
चर्चा के दौरान स्थानीय जल संकट के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने बेबाक राय रखी:
- मनोज द्विवेदी ने कंक्रीट के बढ़ते जाल को जल संकट का मुख्य कारण बताते हुए इसमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
- विनोद पाठक (संरक्षक, पर्यावरण परिवार) ने सामूहिक सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव दिया।
- मनोज पाठक ने कहा कि जल का न्यायसंगत वितरण समाज और प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है।
- सुप्रीत केसरी बालाजी ने आगाह किया कि पॉलिथीन के अत्यधिक उपयोग के कारण बाजार क्षेत्रों में 400 फीट नीचे तक पानी नहीं मिल रहा है।

अतिक्रमण की भेंट चढ़ते तालाब : एसडीएम ने मांगी लिखित शिकायत
शहर के ऐतिहासिक रामबांध तालाब और उसके सहायक जल निकायों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे पर पर्यावरण चिंतकों ने सामूहिक चिंता जताई। लोगों ने बताया कि जिन तालाबों में कभी शहर नहाता और तैरता था, आज उन्हें मिट्टी से भरकर पक्का निर्माण (अतिक्रमण) किया जा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम संजय कुमार ने उपस्थित लोगों से साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत देने को कहा, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
संस्कार और शिक्षा से बचेगा पानी
- अनिल पांडेय (पूर्व उपाध्यक्ष, नगर परिषद) ने कहा कि जल संरक्षण एक ‘संस्कार’ है जिसे नई पीढ़ी में रोपना होगा।
- आनंद पांडेय और दिवाकर तिवारी ने सुझाव दिया कि स्कूली बच्चों के बीच सघन जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है।
- विपिन तिवारी ने चेताया कि भौतिकता और तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में हम अपने ही जल स्रोतों को नष्ट कर रहे हैं।
प्रशासन का संकल्प : जनभागीदारी से बनेगा ‘जन-आंदोलन’
एसडीएम संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जल संकट का स्थायी समाधान केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। उन्होंने कहा :
“प्रशासन और समाज के बीच यह संवाद इसीलिए है, ताकि हम गिरते भूजल स्तर और पारंपरिक जल स्रोतों (कुएँ-तालाब) की उपेक्षा को रोक सकें। प्राप्त सुझावों को जल्द ही जिला प्रशासन की कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।”
निष्कर्ष : कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लगभग दो दर्जन प्रबुद्ध नागरिकों ने जल की एक-एक बूंद बचाने का सामूहिक संकल्प लिया। कॉफी विद एसडीएम के इस विशेष कार्यक्रम में जल संरक्षण पर हुई चर्चा ने गढ़वा में जल क्रांति की नई उम्मीद जगाई है।





