मुख्य बिंदु (Highlights):
- समाहरणालय पर प्रदर्शन से पहले गोविंद हाई स्कूल के मैदान में हुई जनसभा।
- यूजीसी कानून वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने और आरक्षण की समीक्षा की उठी मांग।
- उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा गया 5 सूत्री मांग पत्र।
News UDI | गढ़वा : यूजीसी कानून को वापस लेने, एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम समाप्त करने तथा आरक्षण नीति की समीक्षा करने समेत अपनी पांच सूत्री मांगों के समर्थन में बुधवार को सवर्ण एकता मंच की जिला इकाई द्वारा गढ़वा समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया गया। धरना-प्रदर्शन से पूर्व गोविंद उच्च विद्यालय के मैदान में एक जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें दर्जनों वक्ताओं ने मंच की मांगों के पक्ष में अपने विचार रखे।
“तुष्टीकरण की नीति से बढ़ रहा है भेदभाव”

जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में सवर्ण समाज का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके बावजूद, आजादी के बाद से देश में सबसे अधिक कानून सवर्ण समाज के ही विरोध में बनाए और लागू किए गए हैं। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात समानता के मूल सिद्धांत को ध्यान में रखकर संविधान लागू किया गया था, लेकिन पिछले आठ दशकों के दौरान समाज के ही एक बड़े वर्ग को अधिकारों से वंचित करने की निरंतर साजिश की जा रही है। उनका आरोप था कि इसी तुष्टीकरण नीति के कारण देश की एकता और अखंडता पर असर पड़ रहा है तथा समाज में भेदभाव और असमानता बढ़ रही है।
सवर्ण समाज के नेताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वजों द्वारा ऐसे कानूनों का कड़ा विरोध न किए जाने का परिणाम आज की वर्तमान पीढ़ी को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज भी सवर्ण समाज चुप रहा और सरकार की नीतियों पर सवाल नहीं उठाए तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया मांग पत्र

जनसभा के पश्चात मंच के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक मांग पत्र सौंपा। प्रेषित मांग पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
- यूजीसी कानून को वापस लिया जाए।
- आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए।
- एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को समाप्त किया जाए।
- सवर्ण आयोग का गठन किया जाए।
कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

जनसभा को अमृत शुक्ला, विनोद पाठक, डा. रमेश चंचल, राजेश चौबे, जितेंद्र सिन्हा, बबन सिंह, कमलेश्वर पांडेय, ब्रजेंद्र पाठक, ओंकार तिवारी, आनंद मोहन तिवारी, डा. मकबूल आलम, अंजनी तिवारी, नारद तिवारी सहित कई अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन विनोद तिवारी ने किया।

ज्ञापन सौंपने के अवसर पर मंटू पांडेय, परशुराम उपाध्याय, अविनाश दुबे, चितरंजन सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह, अमरेंद्र कुमार सिंह, अजय सिंह, सच्चिदानंद सिंह, भूषण कुमार देव, यशवंत सिंह, राज कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, मिथिलेश सिंह, विपिन बिहारी सिंह, आशुतोष तिवारी, कमरुद्दीन खां, डा. एस. चौबे, मंतोष सिंह, संतोष उपाध्याय और रामकरेश चौबे समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।














