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गढ़वा में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन : 1,41,463 मामलों का निष्पादन, ₹3.61 करोड़ से अधिक की सेटलमेंट राशि तय

On: September 13, 2026 12:05 AM
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News UDI | गढ़वा : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) रांची के तत्वावधान में शनिवार (12 सितंबर 2026) को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), गढ़वा द्वारा व्यवहार न्यायालय गढ़वा और अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय नगर उंटारी में वर्ष की तीसरी ‘राष्ट्रीय लोक अदालत-सह-मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर’ का ऐतिहासिक और सफल आयोजन किया गया।

ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हुआ भव्य उद्घाटन

कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यकारी अध्यक्ष (झाविप्रा) श्री सुजीत नारायण प्रसाद के कर कमलों द्वारा सिविल कोर्ट, धनबाद से किया गया।

वहीं, गढ़वा व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-गढ़वा के प्रशासनिक न्यायाधीश श्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर पांच लाभुक महिलाओं ने पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पूर्व गढ़वा पहुंचने पर न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जबकि गढ़वा अदालत परिसर पहुंचने पर न्यायमूर्ति का पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से भव्य स्वागत किया गया।

मंच पर मुख्य अतिथियों का स्वागत बुके, पौधा और स्मृति चिह्न देकर किया गया।

झूठे मुकदमों में समय-पैसा न गंवाएं, डीएलएसए के मध्यस्थता केंद्र पहुंचे : न्यायमूर्ति

समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने आम जनमानस को जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा:

” जानकारी के अभाव में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लगभग 70 प्रतिशत बजट बिना उपयोग के वापस लौट जाता है। न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और सामाजिक तथा कानूनी दोनों रूपों में न्याय न्यायालय से प्राप्त होता है। गढ़वा में जुटी यह विशाल भीड़ यह साबित करती है कि यहां के लोग कानून के प्रति काफी जागरूक हैं।”

न्यायमूर्ति ने कहा कि मुकदमों में कुछ मामले आवश्यक और कुछ अनावश्यक होते हैं। लोग छोटी-छोटी बातों पर मुकदमे दर्ज करा देते हैं, जो बाद में झूठे साबित होते हैं। ऐसे झूठे मुकदमों के चक्कर में लोग अपने जरूरी काम छोड़कर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।

उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे अपने छोटे-बड़े विवादों को डीएलएसए द्वारा संचालित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में आपसी सहमति से सुलझाएं। साथ ही, समाज के वंचितों को न्याय दिलाना हर नागरिक का परम कर्तव्य है।

लोक अदालत में कोई फीस नहीं, पुरानी फीस भी होती है वापस: पीडीजे

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष (डालसा) श्री मनोज प्रसाद ने कहा कि यहां आए लोगों को ‘लाभुक’ कहना उचित नहीं है, वे अपने अधिकारों को लेने उपस्थित हुए हैं।

उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से:

  • सुलहनीय आपराधिक मामले
  • चेक बाउंस से जुड़े मामले
  • मोटर दुर्घटना दावा (MACT)
  • बिजली एवं पानी के विवाद
  • पारिवारिक एवं सिविल विवादों का त्वरित निष्पादन किया जाता है।

विशेष लाभ: लोक अदालत में कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और लंबित मुकदमों के निपटारे पर पूर्व में दी गई फीस भी वापस कर दी जाती है।

प्रशासनिक पदाधिकारियों व बार एसोसिएशन के विचार

  • उपायुक्त-सह-उपाध्यक्ष श्री पशुपतिनाथ मिश्रा: जिला प्रशासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और लोगों से इनका लाभ उठाने का आह्वान किया।
  • बार एसोसिएशन अध्यक्ष श्री भृगुनाथ चौबे: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधिक जागरूकता पर बल दिया।
  • पुलिस अधीक्षक-सह-सदस्य श्री आशुतोष शेखर: धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

आंकड़ों की नजर में: 1,41,463 मामलों का निष्पादन

जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती निभा रंजना लकड़ा ने बताया कि लोक अदालत को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 15 पीठों (Benches) का गठन किया गया था। गढ़वा न्याय मंडल और नगर उंटारी अनुमंडलीय न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न पीठों की कमान संभालकर मामलों का निष्पादन किया।

मामले का प्रकारनिष्पादित मामलों की संख्या
प्री-लिटिगेशन मामले1,36,549
राजस्व मामले2,615
स्थायी लोक अदालत1,275
आपराधिक शमनीय (कम्पाउंडेबल) वाद633
बैंक से संबंधित मामले163
बिजली से संबंधित मामले147
कुटुम्ब न्यायालय से जुड़े वाद71
मोटरवाहन अधिनियम (MVA)10
कुल निष्पादित मामले1,41,463
कुल सेटलमेंट राशि₹3,61,79,843/- (तीन करोड़ एकसठ लाख उनासी हजार आठ सौ तैंतालीस रुपये)

14 स्टॉल के जरिए परिसंपत्तियों का वितरण

कार्यक्रम स्थल पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों द्वारा 14 स्टॉल लगाए गए थे। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव एवं अन्य अतिथियों द्वारा लाभुकों के बीच चल-अचल परिसंपत्तियों का वितरण किया गया।

मंच संचालन एवं गरिमामयी मौजूदगी

कार्यक्रम का मंच संचालन सब जज आलोक नाथ झा एवं मोनिका प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया।

उपस्थित प्रमुख न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी: प्रधान न्यायाधीश (कुटुम्ब न्यायालय) श्री मनोज चन्द्र झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम-सह-विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्री दिनेश कुमार, एडीजे-4 आशुतोष कुमार पांडेय, मुंसिफ अभिनव त्रिपाठी, डालसा सचिव निभा रंजना लकड़ा, अनुलिका कुमार सहित कई न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता, एलएडीसी (LADC) सदस्य, पैनल अधिवक्ता, पारा लीगल वालंटियर्स (PLV), वादकारी और बड़ी संख्या में लाभुक उपस्थित थे।

Chinmay bhardwaj

Chinmay Bhardwaj is a journalist at News UDI covering local news from Garhwa and nearby areas of Jharkhand.

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