News UDI | गढ़वा : जिले के स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सिविल सर्जन (CS) डॉ. जान एफ. केनेडी ने शुक्रवार को शहर के निजी अस्पतालों में औचक छापेमारी की। इस कार्रवाई ने निजी नर्सिंग होम की बदहाल व्यवस्था और मरीजों की जान से हो रहे खिलवाड़ की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। बिना डॉक्टरों के चल रहे दो अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से बंद करने और मरीजों को सदर अस्पताल शिफ्ट करने का कड़ा आदेश दिया गया है।
न डॉक्टर, न सिस्टम : सिर्फ मरीजों का ‘शिकार’
सिविल सर्जन की छापेमारी के दौरान जो हकीकत सामने आई, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। कई अस्पतालों में गंभीर मरीज तो भर्ती थे, लेकिन उनकी देखभाल के लिए एक भी योग्य चिकित्सक मौजूद नहीं था।
1. रिशु राज हॉस्पिटल : 5 सिजेरियन मरीज, पर डॉक्टर नदारद

सबसे भयावह स्थिति रिशु राज हॉस्पिटल में दिखी। यहाँ सिजेरियन (ऑपरेशन) से प्रसव कराई गई 5 महिलाएं भर्ती थीं, लेकिन पूरे अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं था। सिविल सर्जन ने इसे गंभीर लापरवाही और मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ मानते हुए तत्काल अस्पताल बंद करने और सभी मरीजों को सदर अस्पताल शिफ्ट कराने का आदेश दिया।
2. सहारा हॉस्पिटल : नर्स ने बोला झूठ, CS ने फोन पर पकड़ी चोरी
सहारा हॉस्पिटल में छत्तीसगढ़ की एक महिला रक्तस्राव (Bleeding) की समस्या के बाद खून चढ़वाने के लिए भर्ती थी। यहाँ मौजूद नर्स ने CS को गुमराह करते हुए दावा किया कि भवनाथपुर CHC के MOIC डॉ. दिनेश कुमार मरीज को देख कर गए हैं। लेकिन जब CS ने तुरंत डॉ. दिनेश को फोन लगाया, तो उन्होंने बताया कि वह खरौंधी में हैं और सहारा हॉस्पिटल नहीं गए। झूठ पकड़े जाने पर अस्पताल प्रबंधन की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।
3. चंद्रिका (झारखंड) हॉस्पिटल और GN हॉस्पिटल
- चंद्रिका हॉस्पिटल (उर्फ झारखंड हॉस्पिटल) : गढ़वा कचहरी के निकट स्थित इस अस्पताल में न कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई मरीज। पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त पाई गई।
- GN हॉस्पिटल : यहाँ भी सिजेरियन ऑपरेशन वाली एक महिला भर्ती मिली, लेकिन इलाज के लिए कोई अधिकृत डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं था।
सरकारी डॉक्टर रडार पर : ‘निजी सेवा’ में व्यस्त, सरकारी में सुस्त?
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कई निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने वालों में गढ़वा के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉ. कुश कुमार और डॉ. मनोज दास के साथ-साथ मेदिनीनगर के डॉ. कादिर परवेज का नाम सामने आया है।
“इन डॉक्टरों से स्पष्टीकरण (Show-Cause) मांगा जाएगा कि अगर वे अपना अधिकतम समय निजी अस्पतालों में दे रहे हैं, तो फिर सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी कब निभाते हैं? यह गंभीर अनुशासनहीनता है।” — डॉ. जान एफ. केनेडी, सिविल सर्जन, गढ़वा
CS की कड़ी चेतावनी : ‘मानक नहीं तो ताला लगा दें’
सिविल सर्जन ने स्पष्ट शब्दों में जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों को अल्टीमेटम दिया है :
- यदि अस्पताल में निर्धारित मानकों के अनुसार डॉक्टर और बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो संचालक स्वयं अस्पताल बंद कर दें।
- आदेश का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को चिन्हित कर सील किया जाएगा।
- मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष : इस कार्रवाई से जिले के फर्जी और मानक विहीन नर्सिंग होम संचालकों में खलबली मची हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अभियान अभी थमेगा नहीं और पूरे जिले के क्लिनिकों की सघन जांच जारी रहेगी।














