News UDI | गढ़वा : समाज की कुरीतियों को जड़ से मिटाने और बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाने के उद्देश्य से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, मेराल में एक भव्य विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मदर्स डे के विशेष अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने न केवल अपने कानूनी अधिकारों को जाना, बल्कि समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने का ‘विजय संकल्प’ भी लिया।
न्यायिक मार्गदर्शन में जागरूकता की पहल
यह कार्यक्रम झालसा, रांची के निर्देशानुसार और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष (DLSA, एवं गढ़वा) मनोज प्रसाद एवं सचिव निभा रंजना लकड़ा के कुशल मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। यह आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित 90 दिवसीय आउटरीच प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
बाल विवाह : समाज के लिए अभिशाप और कानूनी सजा

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता LADCS की डिप्टी चीफ अनिता रंजन ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बेहद कड़े शब्दों में कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप है, जो बच्चियों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को पूरी तरह बाधित कर देता है।
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया :
- धारा 9 एवं 10 : इसके तहत बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या उसे बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान है।
- निशुल्क सहायता : उन्होंने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि किसी भी संकट की स्थिति में वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार से नि:शुल्क कानूनी मदद ले सकती हैं।
नालसा ‘आशा स्कीम 2025’ और शिक्षा का अधिकार

अनिता रंजन ने केंद्र सरकार और नालसा की महत्वाकांक्षी ‘आशा स्कीम 2025’ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना विशेष रूप से महिलाओं और बच्चियों को त्वरित कानूनी सहायता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इसके साथ ही ‘शिक्षा के अधिकार’ को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताया गया।
मदर्स डे : संस्कारों और सम्मान का संगम
चूँकि अवसर मदर्स डे का था, इसलिए वक्ताओं ने जीवन में माँ के सर्वोच्च स्थान और उनके त्याग पर चर्चा की। छात्राओं को प्रेरित किया गया कि वे अपनी माँ के सम्मान और समाज में महिलाओं की गरिमा को बनाए रखने के लिए खुद को शिक्षित और स्वावलंबी बनाएं।
इनकी रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में PLV रीता कुमारी, रामाशंकर चौबे और राम एकबाल चौबे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों से बचने और शिक्षा को ही एकमात्र हथियार बनाने पर जोर दिया।
संकल्प की गूँज : कार्यक्रम के अंत में कस्तूरबा विद्यालय की सैकड़ों छात्राओं ने एक स्वर में बाल विवाह रोकने और अपनी शिक्षा को प्राथमिकता देने की शपथ ली। छात्राओं के इस जोश ने स्पष्ट कर दिया कि गढ़वा की बेटियां अब अपने अधिकारों के लिए सजग हैं।














