मुख्य बिंदु:
- अभियान: भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का हिस्सा।
- पहुंच: 8 प्रखंडों के 94 गांवों तक पहुंचा ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’।
- प्रभाव: लगभग 35,000 लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ लिया संकल्प।
- आयोजक: लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान एवं ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’।
News UDI | गढ़वा : बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए गढ़वा जिले में चलाया गया ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान सफलता के साथ संपन्न हुआ। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर आयोजित इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान ने जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बदलाव की नई इबारत लिखी है।
अभियान के समापन पर लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी के इस मॉडल से ‘बाल विवाह मुक्त गढ़वा’ और ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ का लक्ष्य अब दूर नहीं है।
आंकड़ों में अभियान की सफलता
उप विकास आयुक्त (DDC), गढ़वा द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया यह रथ पिछले 12 दिनों से जिले की सड़कों पर दौड़ रहा था। इस दौरान:
- रथ ने कुल 2257 किलोमीटर की दूरी तय की।
- 8 प्रखंडों के 94 गांवों में सीधा संपर्क साधा गया।
- लगभग 35,000 लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और कानूनी दंड के प्रति जागरूक किया गया।
- दुर्गम क्षेत्रों में मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया।
बाल विवाह, विवाह नहीं बल्कि अपराध है
लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के सचिव श्री सी.पी. यादव ने इस अभियान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “यह केवल एक प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी, बल्कि पहियों पर चलता बदलाव का संदेश था। अब समाज यह स्वीकार कर रहा है कि बाल विवाह कोई परंपरा नहीं, बल्कि बच्चों के साथ होने वाला अपराध है। यह बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेलता है।”
तीन चरणों में चला जागरूकता का चक्र
अभियान को बेहद रणनीतिक तरीके से तीन चरणों में पूरा किया गया:
- प्रथम चरण: शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों को जोड़ा गया।
- द्वितीय चरण: धर्मगुरुओं, कैटरर्स, टेंट हाउस मालिकों, बैंड और घोड़ी वालों से संपर्क किया गया। उन्हें सख्त हिदायत दी गई कि विवाह से पूर्व आयु की जांच अनिवार्य है और बाल विवाह में सहयोग देना जेल की सजा का कारण बन सकता है।
- तृतीय चरण: ग्राम पंचायतों के स्तर पर सघन जागरूकता फैलाई गई ताकि ग्रामीण समाज खुद इस कुप्रथा के खिलाफ खड़ा हो सके।
बदलाव की ओर बढ़ते कदम
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नेटवर्क के सहयोग से देश के 439 जिलों में यह अभियान चलाया जा रहा है। गढ़वा में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज के साझा प्रयासों ने इसे एक ‘जन आंदोलन’ का रूप दे दिया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए अब जिला पूरी तरह एकजुट नजर आ रहा है।







