General Crime Jharkhand Garhwa Ranchi Palamu Sports National International Tech Entertainment

ग्रामीणों पर लाठीचार्ज निंदनीय, दोषियों पर कार्रवाई हो : जयप्रकाश मिंज

On: March 11, 2026 10:57 PM
Follow Us:
बरवाहा गांव लाठीचार्ज मामले पर गढ़वा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते आदिवासी महासभा के पदाधिकारी
--Advertisement Here--

News UDI | गढ़वा : जिले के रंका थाना क्षेत्र अंतर्गत विश्रामपुर पंचायत के बरवाहा गांव में ग्रामीणों पर पुलिस लाठीचार्ज की घटना को लेकर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और स्वतंत्र तथ्य अन्वेषण दल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे वन अधिकार कानून का उल्लंघन और गंभीर मानवाधिकार हनन बताया है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिले से बाहर के अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रेसवार्ता में उठाया गया मामला

बुधवार को गढ़वा के चिनियां रोड स्थित होटल कृष्णा हरि में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के केंद्रीय पदाधिकारियों और तथ्य अन्वेषण दल के सदस्यों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कई सवाल उठाए।

संगठन का कहना है कि 7 मार्च 2026 को रंका प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत सचिवालय में मंडल डैम विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

बैठक समाप्त होने के बाद अधिकारियों का काफिला प्रस्तावित पुनर्वास स्थल का निरीक्षण करने के लिए बरवाहा गांव पहुंचा। आरोप है कि गांव में अचानक बड़ी संख्या में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को देखकर ग्रामीणों ने काफिले को रोककर आने का कारण पूछा।

इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई और आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के ग्रामीणों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें महिलाओं सहित करीब 14 लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

महिलाओं और बच्चों के घायल होने का आरोप

जांच दल का दावा है कि घटना के समय वहां बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं और कई ग्रामीण निहत्थे थे। बावजूद इसके पुलिस ने बल प्रयोग किया।

जांच दल के अनुसार, लाठीचार्ज में महिलाएं और एक 15 वर्षीय बच्चा भी घायल हुआ, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी के बिना महिलाओं पर बल प्रयोग कैसे किया गया।

वन अधिकार कानून उल्लंघन का आरोप

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और जांच दल ने प्रशासन पर वन अधिकार कानून 2006 और वन अधिकार नियमावली 2008 की अवहेलना का आरोप लगाया है।

संगठन का कहना है कि जिस जमीन को मंडल डैम विस्थापितों के पुनर्वास के लिए चिन्हित किया गया है, उस पर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पहले ही सामुदायिक वन अधिकार के तहत दावा किया जा चुका है।

वन अधिकार कानून की धारा 3(1) आदिवासी और पारंपरिक वनवासियों को उनकी पारंपरिक वनभूमि पर अधिकार प्रदान करती है, जबकि धारा 4(5) के अनुसार वन अधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी वन निवासी को उसकी जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा वन अधिकार नियमावली 2008 के तहत वनभूमि से जुड़े मामलों में ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य होती है।

जांच दल का आरोप है कि ग्रामसभा द्वारा वन भूमि देने से स्पष्ट इनकार किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है, जो कानून की अवहेलना है।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जांच दल का कहना है कि:

  • निहत्थे ग्रामीणों और महिलाओं पर लाठीचार्ज करना अत्यधिक बल प्रयोग है।
  • महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति में महिलाओं पर बल प्रयोग करना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
  • यह कार्रवाई मानवाधिकारों का गंभीर हनन है।

संगठन का कहना है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

संगठन की प्रमुख मांगें

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और तथ्य जांच दल ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  1. निहत्थे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज करने वाले दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
  2. घायल ग्रामीणों को उचित मुआवजा और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
  3. वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों का पालन करते हुए ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का पुनर्वास या भूमि अधिग्रहण रोका जाए।
  4. आदिवासी समुदाय के वनाधिकार, आजीविका अधिकार और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के अधिकारों को अनदेखा कर जबरन पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो क्षेत्र में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

जांच दल में ये लोग शामिल

इस मामले की जांच के लिए गठित जांच दल में फिलिप कुजूर, सुनील मिंज, विश्राम बाखला, माणिकचंद कोरवा, दयाकिशोर मिंज, आर्गेन केरकेट्टा, लखन उरांव, रामलखन सिंह और कविता सिंह खरवार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के पदाधिकारी शामिल थे।

संबंधित वीडियो :
जानकारी देते अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सदस्य
जानकारी देते अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सदस्य

Join WhatsApp

Join Now

YouTube

Subscribe

Join Instagram

Join Now

Also Read

news udi

श्रीकृष्ण गौशाला में भव्य सम्मान समारोह : नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों का हुआ जोरदार अभिनंदन; विकास का लिया संकल्प

news udi

श्री बंशीधर नगर में रफ्तार का कहर : दो बाइकों की भिड़ंत में महिला की दर्दनाक मौत, पति और मासूम बेटी समेत तीन गंभीर

गढ़वा में ‘बाल विवाह मुक्त समाज’ के लिए DLSA ने कसी कमर : दो स्कूलों में विधिक जागरूकता की गूँज

news udi

गढ़वा के उंचरी में गोकशी पर वज्रपात : SDM-SDPO की अगुवाई में अवैध बूचड़खाना जमींदोज, पशुओं के कान के ‘टैग’ खोलेंगे राज

News UDI

वादे के पक्के निकले DDC पशुपतिनाथ मिश्र : व्यस्तता के बाद भी मत्था टेकने पहुंचे चेचरिया संकटमोचन मंदिर, ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

News UDI

गढ़वा : धान अधिप्राप्ति में धांधली पर बड़ी कार्रवाई; FPO अध्यक्ष का कमीशन कटा, कंप्यूटर ऑपरेटर बर्खास्त, लाइसेंस रद्द करने का आदेश