News UDI | गढ़वा : जिला स्थापना शाखा, गढ़वा द्वारा शनिवार को जारी राजस्व उप निरीक्षकों (Revenue Sub-Inspectors) की तबादला सूची चर्चा का विषय बन गई है। 36 कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए जारी इस सरकारी आदेश ने प्रशासनिक सजगता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सूची में न केवल मृत कर्मचारी का नाम शामिल है, बल्कि निलंबित और जिले में अस्तित्व ही न रखने वाले नामों को भी इधर से उधर कर दिया गया है।
मरे हुए कर्मचारी को मिली नई जिम्मेदारी!
सूची की सबसे चौंकाने वाली बात गौरव आनंद का नाम है। राजस्व उप निरीक्षक गौरव आनंद का निधन 12 नवंबर 2025 को ही हो चुका है। विभाग की फाइलों में शायद वे अब भी ‘जीवित’ हैं, तभी तो उन्हें भवनाथपुर अंचल से रंका अंचल स्थानांतरित करने का लिखित आदेश जारी कर दिया गया।
निलंबित कर्मी पर भी मेहरबानी
लापरवाही का आलम यहीं नहीं रुका। राजस्व उप निरीक्षक शिवपत राम, जो वर्तमान में निलंबित चल रहे हैं और जिनका मुख्यालय खरौंधी तय है, उनका भी तबादला कर दिया गया। आदेश के अनुसार, उन्हें भंडरिया अंचल से सगमा अंचल भेजा गया है। नियमतः निलंबन अवधि में इस तरह का स्थानांतरण प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
‘मिस्टर इंडिया’ कर्मचारी : जिनका जिले में अता-पता नहीं, उनका भी ट्रांसफर
प्रशासनिक चूक की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब सूची में दो ऐसे नाम सामने आए जो गढ़वा जिले में कार्यरत ही नहीं हैं:
- मनोज कुमार पासवान: इन्हें भवनाथपुर से मझिआंव भेजा गया है।
- अरविंद महतो: इन्हें डंडई से नगर उंटारी स्थानांतरित किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि पूरे जिले में इन नामों का कोई राजस्व उप निरीक्षक पदस्थापित ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये नाम सूची में आए कहाँ से?
प्रशासनिक साख पर सवाल
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियाँ सामने आने के बाद जिला प्रशासन की भारी किरकिरी हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या तबादला सूची बिना फाइलों की जांच किए ‘कॉपी-पेस्ट’ के भरोसे बनाई गई थी? अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गड़बड़ी को कैसे सुधारा जाता है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।






