मजबूरी पर भारी पड़ा सेवा भाव : पैसे के अभाव में 20 साल से सिर पर ‘बोझ’ ढो रही थी गरीब सरवरी, डॉ. इकबाल ने आयुष्मान से किया कमाल
News UDI | गढ़वा : जहाँ आज के दौर में इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिल गरीबों की कमर तोड़ देते हैं, वहीं गढ़वा सदर अस्पताल से मानवता और सेवा भाव की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर आपका भरोसा जगा देगी। यहाँ के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. इकबाल अंसारी ने न केवल अपनी डॉक्टरी का हुनर दिखाया, बल्कि एक गरीब परिवार की बेबसी को समझते हुए सेवा भाव को सर्वोपरि रखा।
गरीबी और बीमारी की दोहरी मार
गढ़वा प्रखंड के निमियांडीह निवासी हिदायत अंसारी की पत्नी सरवरी खातून पिछले 20 वर्षों से अपने सिर के पिछले हिस्से में एक ‘सिस्टिक स्वेलिंग’ (गांठ) लेकर जी रही थी। बचपन की यह गांठ उम्र के साथ बड़ी और कष्टदायक होती जा रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय है कि वे किसी बड़े शहर या निजी अस्पताल में ऑपरेशन का खर्च वहन करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। सरवरी के लिए चैन की नींद सोना एक सपना बन गया था।
निजी क्लीनिकों ने फेरा मुंह, सदर अस्पताल ने थामा हाथ
इलाज के लिए जब परिवार ने हाथ-पैर मारे, तो निजी अस्पतालों के खर्च सुनकर उनके पैर उखड़ गए। ऐसे में उम्मीद की आखिरी किरण बनकर डॉ. इकबाल अंसारी सामने आए। उन्होंने मरीज की हालत और परिवार की गरीबी को देखा, तो तुरंत आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त ऑपरेशन का रास्ता निकाला। डॉ. इकबाल और ओटी स्टाफ अरुणंजय द्विवेदी उर्फ बबलू की टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उस 20 साल पुरानी गांठ को जड़ से निकाल फेंका।

मरीज के चेहरे पर मुस्कान, परिवार की आंखों में खुशी के आंसू
सफल ऑपरेशन के बाद सरवरी अब पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे की मुस्कान और परिवार की आंखों में झलती राहत की चमक बता रही है कि उनके लिए डॉ. इकबाल किसी ‘फरिश्ते’ से कम नहीं हैं। परिवार वालों ने भावुक होते हुए कहा :
“हम तो हार मान चुके थे कि शायद अब कभी ठीक नहीं हो पाएगी, लेकिन सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने हमारी गरीबी को समझा और बिना एक पैसा लिए हमारी पत्नी को नया जीवन दे दिया।”
सिविल सर्जन का संदेश : सेवा ही धर्म है
इस मानवीय पहल पर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने डॉ. इकबाल की टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि सदर अस्पताल का लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि हर उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है जो गरीबी के कारण इलाज से वंचित रह जाता है।





