News UDI | गढ़वा : नियति की क्रूरता और अपनों की बेरुखी के बीच संघर्ष कर रही 24 वर्षीय कांति देवी आखिरकार मौत से हार गई। गढ़वा सदर अस्पताल में पिछले कई हफ्तों से मौत को मात देने की कोशिश कर रही कांति ने रविवार की शाम अंतिम सांस ली। कांति की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि दो मासूम बच्चों के सिर से मां का आंचल भी छीन लिया है।
75% झुलस चुका था शरीर, गरीबी बनी इलाज में बाधा
घटना 14 जनवरी 2026 की है। कांडी थाना क्षेत्र के राणाडीह गांव (मायका) में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कांति आग ताप रही थी। इसी दौरान अनजाने में उसके कपड़ों में आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग की लपटों ने उसे घेर लिया, जिससे उसका शरीर 75 प्रतिशत से ज्यादा जल गया था।
अत्यंत गरीब माता-पिता ने अपनी हैसियत से बढ़कर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन संक्रमण और घावों की गंभीरता के आगे कांति का शरीर जवाब दे गया।
रिश्तों की कड़वाहट और बेबसी की दास्तां
कांति की कहानी सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा की भी दास्तां है।
- पति का साथ छूटा : मृतका का पति विनोद पासवान ग्राम गाड़ा, थाना कांडी) करीब एक साल पहले ही उसे बेसहारा छोड़कर अलग रहने लगा था।
- मायके में मिली शरण : पति के जाने के बाद कांति अपने दो बच्चों के साथ मायके (राणाडीह) में रह रही थी।
- बुजुर्ग कंधों पर जिम्मेदारी : अब 6 साल की अनु कुमारी और मात्र 6 माह के दुधमुंहे अनुराग के भविष्य की जिम्मेदारी उनके बूढ़े नाना मेघनाथ राम और नानी कलावती देवी पर आ गई है।
अनाथ हुए मासूम : भविष्य पर गहराया संकट
कांति की मौत के बाद अस्पताल से लेकर गांव तक मातम पसरा है। सबसे मार्मिक दृश्य उन दो बच्चों का है, जिन्हें शायद यह भी पता नहीं कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। विशेषकर 6 माह का अनुराग, जिसे अब मां की ममता और दूध दोनों से महरूम होना पड़ेगा।
“बेटी को बचाने के लिए हमने सब कुछ झोंक दिया, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। अब इन दो अनाथ बच्चों को पालना हमारे लिए पहाड़ जैसा है।” > — मेघनाथ राम (मृतका के पिता)
प्रशासनिक मदद की दरकार
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और समाजसेवियों से गुहार लगाई है कि इन अनाथ बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए सरकारी सहायता प्रदान की जाए। अत्यंत गरीबी में जी रहे नाना-नानी के लिए इन दो मासूमों का भविष्य संवारना एक बड़ी चुनौती है।






