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पलामू का ‘मसीहा’ खामोश : सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विश्वनाथ ओझा का निधन, चिकित्सा जगत में एक युग का अंत

On: April 6, 2026 11:11 PM
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News UDI | पलामू : पलामू की धरती ने आज अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है। प्रमंडल के सुप्रसिद्ध चिकित्सक और हजारों चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले डॉ. विश्वनाथ ओझा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर जैसे ही मेदिनीनगर की गलियों से होकर गुजरी, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। क्या आम, क्या खास—हर कोई इस खबर से स्तब्ध और मर्माहत है।

सेवा और समर्पण का पर्याय थे डॉ. ओझा

डॉ. विश्वनाथ ओझा केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि पलामू के लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम थे। दशकों तक मेदिनीनगर को अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. ओझा ने चिकित्सा को कभी पेशा नहीं, बल्कि ‘इबादत’ समझा। उनकी सटीक इलाज पद्धति और मरीजों के प्रति उनका स्नेहपूर्ण व्यवहार उन्हें अन्य चिकित्सकों से अलग खड़ा करता था।

“उन्होंने उस दौर में चिकित्सा सेवा की मशाल जलाई, जब संसाधन बेहद सीमित थे। उनके जाने से पलामू ने एक अभिभावक खो दिया है।” — स्थानीय नागरिक

संवेदनाओं से भरा व्यक्तित्व

डॉ. ओझा अपनी चिकित्सीय दक्षता के साथ-साथ अपनी मानवीय संवेदनाओं के लिए भी जाने जाते थे। निजी क्लीनिक में भी उनकी खास आदत यह भी थी कि किसी मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करने की जरूरत समझते तो वे तत्काल उससे लिया गया फीस को वापस कर देते थे। समाज के हर वर्ग में उनकी गहरी पैठ थी और लोग उन्हें एक कुशल डॉक्टर के साथ-साथ एक बेहतरीन इंसान और मार्गदर्शक के रूप में देखते थे।

अपूरणीय क्षति

उनके निधन को चिकित्सा जगत के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र के लिए भी एक ‘अपूरणीय क्षति’ माना जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक युग का अंत बताया है।


प्रमुख बिंदु : एक नजर में

  • पहचान : पलामू के सबसे अनुभवी और प्रतिष्ठित चिकित्सक।
  • विशेषता : सटीक निदान और मरीजों के प्रति अटूट समर्पण।
  • योगदान : हजारों गंभीर मरीजों को स्वस्थ कर जीवनदान दिया।
  • शोक : मेदिनीनगर सहित पूरे पलामू प्रमंडल में गमगीन माहौल।

डॉ. विश्वनाथ ओझा का जाना पलामू के उस गौरवशाली अध्याय का समापन है, जिसने निःस्वार्थ सेवा की परिभाषा गढ़ी थी। विनम्र श्रद्धांजलि!

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