News UDI | गढ़वा : रविवार को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गढ़वा शहर के चिनियां मोड़ पर भगवान परशुराम की जयंती पूरे भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में न केवल श्रद्धा का सैलाब उमड़ा, बल्कि समाज को वैचारिक रूप से सशक्त करने का संकल्प भी लिया गया।
विशिष्ट पूजन और भक्तिमय वातावरण
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम की प्रतिमा के समक्ष पूजा एवं हवन के साथ हुआ। अशोक विहार निवासी परशुराम उपाध्याय उर्फ दुदुन उपाध्याय ने मुख्य यजमान के रूप में भगवान का विधिवत पूजन संपन्न किया। ब्रजेंद्र पाठक एवं अरविंद मिश्र के मंत्रोच्चार और जयघोष से पूरा चिनियां मोड़ क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। इसके उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
सेवा का संकल्प : राहगीरों को मिला प्रसाद और शर्बत
गर्मी को देखते हुए आयोजन समिति ने सामाजिक सरोकार का परिचय दिया। मुख्य पथ से गुजरने वाले सैकड़ों राहगीरों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और उन्हें शीतल शर्बत पिलाकर राहत पहुंचाई गई।
‘अधर्म के विरुद्ध एकजुट होने का समय’ – दुदुन उपाध्याय
समाजसेवी परशुराम उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम का अवतार अन्याय और अनीति के विनाश के लिए हुआ था। उन्होंने कहा :
“आज के दौर में जब अत्याचार और व्याभिचार पुनः बढ़ रहा है, हमें परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अधर्म के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है।”

षड्यंत्र का पर्दाफाश : जातिवाद की राजनीति पर प्रहार
गायत्री परिवार के जिला समन्वयक विनोद कुमार पाठक ने समाज के ‘तथाकथित बुद्धिजीवियों’ पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भगवान परशुराम की छवि को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।
- तथ्य बनाम भ्रम : पाठक जी ने स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम ने आतातायी राजाओं को दंडित किया था, न कि किसी विशेष जाति को।
- प्रमाण : उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि परशुराम जी क्षत्रिय विरोधी होते, तो वे भगवान श्री राम (जो स्वयं क्षत्रिय कुल से थे) को अपना अस्त्र सौंपकर आशीर्वाद क्यों देते?
- सीख : उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने मूल ग्रंथों का अध्ययन करें, ताकि महापुरुषों को राजनीति और संकीर्णता की भेंट चढ़ने से बचाया जा सके।
गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे :
- विवेकानंद तिवारी (गढ़वा विधायक प्रतिनिधि)
- आनंद मोहन तिवारी, शैलेंद्र पाठक, दीपक पाठक, नवीन पाठक, अवधेश चौबे।
- छोटू पांडेय, अखिलेश दूबे उर्फ मुन्ना दूबे, सोनू तिवारी, गुड्डु पांडेय।
- जितेंद्र सिंह, सच्चिदानंद सिंह, राजेश दूबे, सूर्यकांत उपाध्याय, कृष्ण मोहन तिवारी।
- अरविंद दूबे, प्रवीण तिवारी, मनोज दूबे, पीयूष दूबे, कमलेश तिवारी।
- संतोष तिवारी, अमरेश तिवारी, पंकज दूबे, आलोक त्रिपाठी।
इनके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कार्यक्रम को सफल बनाया।





