News UDI | गढ़वा : आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों के लिए शनिवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया। गढ़वा सदर अस्पताल परिसर स्थित मलेरिया कार्यालय के सभागार में नारायण हेल्थ, बेंगलुरु के सहयोग से सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों के लिए नि:शुल्क एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए संभावित डोनर की पहचान करना और मरीजों को इस घातक बीमारी से स्थायी मुक्ति दिलाना था।
जागरूकता ही बचाव, ट्रांसप्लांट है स्थायी समाधान
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. जान एफ केनेडी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने कहा :
“थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों का प्रबंधन कठिन है, लेकिन बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के माध्यम से इसका स्थायी इलाज संभव है। हालांकि यह प्रक्रिया खर्चीली है, लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा कर शासन से सहयोग प्राप्त किया जा सकता है।”
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। उन्होंने यह भी चेताया कि बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो अंगों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
प्रमुख विशेषज्ञों की रही मौजूदगी

इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों की टीम ने मरीजों की स्क्रीनिंग की और परिजनों को परामर्श दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित रहे :
- विक्की राय : नारायण हेल्थ, बेंगलुरु
- भागवत भावेश : मां सेवा समिति थैलिसीमिया सोसायटी, गोड्डा
- डॉ. संतोष कुमार मिश्रा : जिला महामारी विशेषज्ञ
- अरविंद कुमार द्विवेदी : जिला भीबीडी कंसल्टेंट
- प्रदीप कुमार : ब्लड बैंक को-ऑर्डिनेटर (मंच संचालन)
कैंप की मुख्य विशेषताएं
- फ्री एचएलए टेस्टिंग : डोनर मैचिंग के लिए महंगे एचएलए टेस्ट नि:शुल्क किए गए।
- स्क्रीनिंग और परामर्श : विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चों की वर्तमान स्थिति की जांच की गई।
- सरकारी सहायता की जानकारी : मरीजों को बताया गया कि कैसे सरकारी मदद से ट्रांसप्लांट की राह आसान हो सकती है।
उमड़ी भीड़, जगी आस
शिविर में गढ़वा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे और उनके अभिभावक पहुंचे। ब्लड बैंक को-ऑर्डिनेटर प्रदीप कुमार के कुशल संचालन में चले इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों को नियमित जांच और आयरन मैनेजमेंट के प्रति जागरूक किया।
निष्कर्ष : यह शिविर उन परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुआ है जो इलाज के भारी खर्च और डोनर की तलाश में भटक रहे थे। स्वास्थ्य विभाग और नारायण हेल्थ की यह पहल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।














