News UDI | गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले के डंडा थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 22 वर्षीय छात्रा ने आरोप लगाया है कि उसके साथ पहले पिस्तौल की नोंक पर दुष्कर्म किया गया, फिर अगवा कर जबरन शादी का ढोंग रचा गया और रास्ते में साला-जीजा ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया।
हैरतअंगेज बात यह है कि पीड़िता ने पुलिस पर ही उसे तीन दिनों तक थाना में रखने और आरोपियों को बचाने के लिए बयान बदलने का दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
पिस्तौल के बल पर लूट ली अस्मत, शादी का दिया झांसा
पीड़िता डंडा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है और पलामू जिले के चैनपुर (पनेरीबांध) में रहकर पढ़ाई कर रही थी। पीड़िता के अनुसार, उसके पड़ोस के कमरे में रहने वाले राहुल चौधरी (18 वर्ष), जो पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बरांव गांव (लकड़ही टोला) का निवासी संतोष चौधरी का पुत्र है, ने उसे अकेला पाकर पिस्तौल के बल पर जबरन शारीरिक संबंध बनाया। विरोध करने पर आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। डर के कारण छात्रा अपने गांव लौट आई।
अगवा कर रचा शादी का ढोंग, नदी के नीचे किया गैंगरेप

वारदात का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 4 अप्रैल 2026 को जब छात्रा के माता-पिता घर पर नहीं थे, तब आरोपी राहुल चौधरी अपने बहनोई आलोक चौधरी के साथ उसके घर पहुंचा और उसे जबरन अगवा कर पलामू के विश्रामपुर (लोहरदगा गांव) ले गया। वहां राहुल की बहन पूजा देवी और बहनोई की मौजूदगी में छात्रा की मांग में जबरन सिंदूर भरकर शादी का ढोंग रचा गया।
पीड़िता का आरोप है कि वहां से वापस लौटते समय डंडा थाना क्षेत्र के समीप तहले नदी के पुल के नीचे राहुल और उसके बहनोई आलोक चौधरी ने बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह दृश्य आसपास में नदी में मछली मार रहे लोगों ने देखा और उन्हें पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन तब तक दोनों आरोपी पीड़िता को लेकर वहां से भाग निकले। तब उन लोगों ने इस घिनौनी करतूत के बारे में गांव वालों को मोबाइल फोन से सूचना दी।
ग्रामीणों ने पकड़ा, पुलिस पर ‘बयान बदलने’ का दबाव डालने का आरोप
बताया गया कि नदी के नीचे घिनौनी करतूत के बाद आरोपितों ने ज्योंही छात्रा को लेकर उसके गांव पहुंचे, वहां ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और पुलिस को सूचना दी। मौका देखकर आरोपी आलोक चौधरी भाग निकला, जबकि राहुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
पीड़िता ने डंडा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा :
- उसे तीन दिनों तक थाने में बिठाकर रखा गया, लेकिन प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई।
- थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों ने उस पर यह झूठ बोलने का दबाव बनाया कि आरोपी के साथ उसका 4 साल से प्रेम संबंध है।
- उसका मोबाइल तोड़ दिया गया, जिसमें राहुल के खिलाफ साक्ष्य थे। टूटा हुआ फोन अब भी पुलिस के पास है।
- पीड़िता का मेडिकल तक नहीं कराया गया और आरोपी राहुल को थाने से ही छोड़ दिया गया।
आश्रय गृह की बदहाली और अब ‘कानूनी’ गुहार
पुलिस ने पीड़िता को गढ़वा प्रखंड कार्यालय स्थित आश्रय गृह में छोड़ दिया था। सोमवार को जब परिजन वहां पहुंचे, तो वहां सुरक्षा और भोजन का घोर अभाव पाया। हालांकि, पीड़िता फिलवक्त आश्रय गृह में ही है। अब न्याय की अंतिम उम्मीद में पीड़िता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गढ़वा की सचिव को पत्र लिखकर आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
अधिकारी का पक्ष
“पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पीड़िता एवं उसके कथित प्रेमी के बीच चार वर्ष पहले से संबंध है। इस मामले में पुलिस विधिसम्मत कार्रवाई करेगी।” — अमन कुमार, पुलिस अधीक्षक, गढ़वा।
सवाल बरकरार : यह भी बात सामने आ रही है – पुलिस ने पीड़िता पर चार साल पहले से ही राहुल चौधरी से कथित तौर पर संबंध होने की बात कबूलवाने का इसलिए प्रयास कर रही है कि पीड़िता पर भी नाबालिग लड़का से संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया जा सके। फिर भी पुलिस की कार्रवाई इस मायने में भी संदेह के घेरे में है कि यदि इस पूरे मामले में जो भी दोषी हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दुष्कर्म पीड़िता का तत्काल मेडिकल नहीं कराया जाना भी, साक्ष्य मिटाने जैसा ही तो है। यदि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की तो पीड़िता को आश्रय गृह में लाकर छोड़ने की क्यों जरूरत पड़ी? पीड़िता के आरोपों ने “खाकी” की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्या एक छात्रा के साथ हुए इस जघन्य अपराध में उसे न्याय मिलेगा? या रक्षक ही भक्षक बनकर आरोपियों को बचाते रहेंगे? यह देखना अब जिला प्रशासन और कानून के रखवालों की जिम्मेदारी है।

















































