News UDI | गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले के रंका थाना पुलिस ने रितेश कुमार रवि हत्याकांड का दिल दहला देने वाला खुलासा किया है। अवैध संबंधों के चलते रची गई इस खूनी साजिश में पुलिस ने मृतक का नरकंकाल बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने एक महिला समेत चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
साजिश ऐसी कि कांप जाए रूह
घटना की शुरुआत रंका थाना क्षेत्र अंतर्गत कंचनपुर निवासी कृष्णा राम के आवेदन से हुई थी, जिसमें उन्होंने अपने 24 वर्षीय पुत्र रितेश कुमार रवि की हत्या का अंदेशा जताया था। रंका पुलिस ने कांड संख्या 31/2026 दर्ज कर जब अनुसंधान शुरू किया, तो परतों के पीछे छिपा खौफनाक सच सामने आया।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस ने संदिग्ध कवेला देवी उर्फ प्रियंका और उसके पति धनंजय उराँव को हिरासत में लिया, तो उन्होंने पूरी वारदात कबूल कर ली। धनंजय ने बताया कि रितेश का उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध था। जब उसने अपनी पत्नी को रितेश से अलग होने को कहा, तो रितेश उन्हें और उनके बच्चों को जान से मारने की धमकी देने लगा। इसी डर और रंजिश के कारण पति-पत्नी ने मिलकर रितेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
मौत का बुलावा : रात के अंधेरे में बिछाया जाल
- प्लानिंग : धनंजय उराँव ने अपने गांव के साथी छोटु उराँव और नेपाली उराँव को इस खूनी खेल में शामिल किया।
- जाल : 7 जनवरी 2026 की रात कवेला देवी ने रितेश को फोन कर कहा कि वह घर पर अकेली है और उसे अपने साथ भागने के लिए बुला लिया।
- हत्या : जैसे ही रितेश घर पहुंचा, वहां पहले से छिपे धनंजय, छोटु और नेपाली ने उस पर हमला कर दिया। चारों ने मिलकर पत्थर से सिर कुचलकर रितेश की हत्या कर दी।
- साक्ष्य मिटाना : आरोपियों ने मोबाइल फोन तोड़ दिए और शव को बोरे में भरकर रबदा-खुरा गांव के पास एक पुराने कुएं में फेंक दिया।
कुएं से बरामद हुआ नरकंकाल, रिम्स रांची भेजा गया
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर जब कुएं में तलाश शुरू की, तो वहां से मृतक का नरकंकाल बरामद हुआ। घटना के महीनों बीत जाने के कारण शव पूरी तरह गल चुका था। पुलिस ने कंकाल को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा भेजा, जहां स्थिति की गंभीरता और विस्तृत फॉरेंसिक जांच को देखते हुए उसे रिम्स (RIMS) रांची रेफर कर दिया गया है।
नरकंकाल से खुलेगा मौत का राज : जानें फॉरेंसिक जांच और DNA टेस्ट की पूरी प्रक्रिया

बरामद कंकाल के पोस्टमार्टम (पोस्टमार्टम/ऑटोप्सी) में मुख्य रूप से पहचान करने और मृत्यु के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। चूंकि कंकाल में शरीर के अंग (नरम ऊतक) नष्ट हो चुके होते हैं, इसलिए सामान्य पोस्टमार्टम से इसकी प्रक्रिया अलग होती है।
मुख्य जांच निम्नलिखित होती हैं :
- DNA टेस्ट : कंकाल की पहचान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच DNA टेस्ट है। इसके लिए हड्डियों (जैसे दांत या फीमर) से नमूना लिया जाता है और परिजनों के रक्त के नमूनों से मिलान किया जाता है।
- हड्डियों का विश्लेषण : डॉक्टर यह देखते हैं कि कहीं कोई हड्डी टूटी तो नहीं है, जो चोट या हत्या का संकेत दे सकती है।
- लिंग और उम्र का अनुमान : कंकाल की बनावट (जैसे पेल्विक बोन और खोपड़ी) के आधार पर व्यक्ति का लिंग और उम्र का अनुमान लगाया जाता है।
- मृत्यु के समय का अंतराल : कंकाल की स्थिति और कुछ वैज्ञानिक तकनीकों (जैसे हैंडहेल्ड स्पेक्ट्रोमेट्री) के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि मौत कितने समय पहले हुई थी।
- अन्य साक्ष्य : कंकाल के साथ मिले कपड़ों या अन्य वस्तुओं की जांच भी फॉरेंसिक टीम द्वारा की जाती है।
यह एक जटिल प्रक्रिया है और अक्सर इसके लिए मेडिकल कॉलेज या विशेषज्ञ फॉरेंसिक लैब की सहायता ली जाती है।
पुलिस की गिरफ्त में हत्यारे
- कवेला देवी उर्फ प्रियंका (33 वर्ष) – पति धनंजय उराँव
- धनंजय उराँव (34 वर्ष) – पिता त्रिवेणी उराँव
- छोटु उराँव (30 वर्ष) – पिता रामचन्द्र उराँव
- नेपाली उराँव (24 वर्ष) – पिता गोविन्द उराँव (सभी निवासी : खुरा, थाना रंका)
छापेमारी टीम में शामिल : इस सफल उद्भेदन में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्री रोहित रंजन सिंह, थाना प्रभारी रवि कुमार केशरी, पु०अ०नि० कुन्दन कुमार और रंका थाना के सशस्त्र बल के जवान मुख्य रूप से शामिल थे।














