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गढ़वा सदर अस्पताल का ‘बेबी स्कैम’: रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाली ANM तारामणि पर मेहरबानी ने खड़े किए सवाल। क्या महज तबादले से धुल जाएंगे मानव तस्करी के दाग ? 

On: April 9, 2026 10:17 PM
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News UDI | गढ़वा : रसूख का नशा और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा जब सरकारी गलियारों को अपनी गिरफ्त में ले ले, तो रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं। गढ़वा सदर अस्पताल में नवजात बच्ची के ‘सौदे’ और सरकारी दस्तावेजों के साथ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने वाली ANM तारामणि कुजूर का अंततः ‘प्रतिनियुक्ति राज’ खत्म हो गया है। सिविल सर्जन (CS), गढ़वा ने दागी एएनएम को तत्काल प्रभाव से सदर अस्पताल से हटाकर रेफरल अस्पताल, भंडरिया भेज दिया है।

यह कार्रवाई सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. माहेरू यमानी द्वारा गठित कमेटी की उस जांच रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें तारामणि द्वारा रजिस्टर में काट-छांट और अवैध दत्तक ग्रहण (Illegal Adoption) कराने के आरोपों की पुष्टि हुई है।


सिस्टेमेटिक घटनाक्रम : कैसे बुना गया ‘पाप’ का ताना-बना?

इस पूरे प्रकरण को अगर सिलसिलेवार तरीके से देखें, तो यह किसी फिल्मी साजिश से कम नहीं है :

  • 21 फरवरी 2026 (दोपहर 2:00 बजे): गढ़वा पाठक मोहल्ला निवासी रूपा देवी (पति लव कुमार) को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • दोपहर 2:35 बजे : रूपा देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बताया गया कि रूपा देवी को अल्ट्रासाउंड जांच में यह पहले ही पता चल चुका था कि गर्भ में पल रहा संतान बेटी है। पहले से तीन बेटियां होने के कारण वह बच्ची को अपने निःसंतान भाई-भाभी को सौंपने का मन बना चुकी थी।
  • साजिश की एंट्री : पलामू के हैदरनगर निवासी राजू कुमार कांस्यकार और उनकी पत्नी कामिनी साहु (रूपा देवी के भाई-भाभी) गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने ओपीडी रजिस्टर, प्रसव कक्ष की भर्ती रजिस्टर आदि सभी कागजातों में जैविक माता पिता की जगह अपना नाम दर्ज कराने का प्रयास किया।
  • नर्सों का इनकार : पहली शिफ्ट की नर्सों ने रजिस्टर में नाम बदलने के अवैध आग्रह को ठुकरा दिया और नियमानुसार जैविक माता-पिता (रूपा-लव) का नाम ही दर्ज किया।
  • तारामणि की ‘जादुई कलम’: शाम की शिफ्ट में ड्यूटी पर आईं ANM तारामणि कुजूर ने कानून को ठेंगे पर रखा। उन्होंने ओपीडी पर्ची, प्रसव रजिस्टर, एल-3 फॉर्मेट और जन्म प्रमाण पत्र के ‘पिंक फॉर्म’ में दर्ज जैविक माता-पिता का नाम काटकर कामिनी साहु और राजू कुमार कर दिया। इसके बाद बच्ची को उन्हें सौंप दिया गया।
  • 12 मार्च 2026 (खुलासा): प्रसूता रूपा देवी दोबारा अस्पताल पहुंची। ड्यूटी पर वही पुरानी नर्सें थीं। उसने नर्सों से दूध सुखने की दवा पूछी। इस दौरान पूछताछ में रूपा ने नर्सों से सारा सच उगल दिया कि कैसे बच्ची का ‘सौदा’ हुआ और कागजों में हेरफेर की गई।
  • 23 मार्च 2026 (कार्रवाई): इसकी जानकारी मिलने पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. माहेरू यमानी ने जांच कमेटी गठित की। जांच कमेटी ने आरोपों को सही पाया (पत्रांक 323)। इसी के आधार पर सिविल सर्जन ने तारामणि को सदर अस्पताल से हटाकर सुदूरवर्ती भंडरिया स्थानांतरित कर दिया।

विवादों का ‘ब्लैक बॉक्स’: तिरंगे का अपमान और अब सरकारी रिकॉर्ड का कत्ल!

तारामणि कुजूर का विवादों से रिश्ता कोई नया नहीं है। उनका इतिहास बताता है कि वे नियम तोड़ने की ‘आदी’ रही हैं :

  1. 2021 में राष्ट्र का अपमान : मेराल प्रखंड अंतर्गत चटनियां PHC में तैनाती के दौरान उन्होंने तिरंगा उल्टा फहराया था। सजा के तौर पर कांडी भेजा गया था।
  2. रसूख का खेल : कुछ ही दिनों में ‘आकाओं’ की मेहरबानी से वे वापस सदर अस्पताल में ‘मलाईदार’ पोस्टिंग (Deputation) पर लौट आईं।
  3. अनुशासनहीनता : सरकारी रजिस्टर में कांट-छांट कर जैविक माता पिता की जगह किसी और का नाम दर्ज करने के मामले में 14 मार्च को मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब उन्होंने 8 दिनों तक देना उचित नहीं समझा, जो यह दर्शाता है कि उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं था।

जांच के घेरे में कई बड़े सवाल : क्या महज तबादला काफी है?

भले ही तारामणि को भंडरिया भेज दिया गया हो, लेकिन यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। जिले में कई गंभीर सवाल हवा में तैर रहे हैं :

  • मानव तस्करी या सेवा?: बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्ची को किसी और को सौंपना और पैसे का लेन-देन (चर्चा के अनुसार) सीधे तौर पर Human Trafficking का मामला है। क्या इस पर FIR होगी?
  • अवैध लिंग परीक्षण का रैकेट : प्रसूता रूपा देवी को प्रसव से पहले ही कैसे पता था कि बच्ची होगी? क्या गढ़वा के अल्ट्रासाउंड केंद्रों में लिंग परीक्षण का काला खेल चल रहा है?
  • सिस्टम का दीमक : क्या सदर अस्पताल में तारामणि जैसे और भी लोग हैं, जो एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हैं?

निष्कर्ष

सिविल सर्जन की इस कार्रवाई की स्वास्थ्य महकमे एवं आम लोगों में चर्चा है। लेकिन जनता की मांग है कि सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने वाली इस एएनएम पर आपराधिक मुकदमा (Criminal Case) चलाया जाए, ताकि भविष्य में कोई दूसरा कर्मचारी सरकारी रिकॉर्ड को अपनी निजी जागीर न समझे।

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