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झारखंड भाजपा की ‘नई’ टीम : पुराने चेहरों का ‘अंगद’ वाला पैर, युवाओं का कटा पत्ता और परिक्रमा वीरों की मौज!

On: March 29, 2026 10:30 PM
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News UDI
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News UDI | रांची : झारखंड प्रदेश भाजपा की बहुप्रतीक्षित नई कमेटी की घोषणा तो हो गई, लेकिन इसके साथ ही पार्टी के भीतर और बाहर असंतोष की चिंगारी भी सुलग उठी है। कहने को तो कमेटी में क्षेत्रीय, जातीय और महिला समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है, लेकिन गहराई से देखने पर यह कमेटी ‘बदलाव’ के बजाय ‘समझौते’ की अधिक नजर आती है।

अंगद के पांव की तरह जमे हैं कुछ चेहरे

कमेटी की सबसे बड़ी चर्चा उन चेहरों को लेकर है जो ‘अंगद के पांव’ की तरह संगठन में जमे हुए हैं। सत्ता बदले या संगठन का मुखिया, इन नेताओं की कुर्सी पर कभी आंच नहीं आती। राकेश प्रसाद, बालमुकुंद सहाय, गणेश मिश्रा, मुनेश्वर साहू और अमरदीप यादव जैसे नाम सालों से किसी न किसी पद पर काबिज हैं। वहीं, शैलेंद्र सिंह को तीसरी बार मौका देकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि यहाँ ‘परफॉर्मेंस’ से ज्यादा ‘पहुंच’ मायने रखती है।

पीएम मोदी का ‘युवा मंत्र’ झारखंड में फेल?

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंचों से युवाओं को राजनीति की मुख्यधारा में लाने और उन्हें जिम्मेदारी देने की वकालत करते हैं, वहीं झारखंड भाजपा की इस कमेटी में युवाओं की भागीदारी नगण्य है। किसलय तिवारी, सुबोध सिंह गुड्डू जैसे सक्रिय चेहरों को दरकिनार कर दिया गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर मायूसी है कि हार से सबक लेने के बजाय पार्टी ने फिर से उन्हीं पुराने कंधों पर दांव खेला है, जिनकी जनता में पकड़ कमजोर हो चुकी है।


चौंकाने वाले नाम : सक्रियता शून्य, पद पूर्ण!

कमेटी में कुछ ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जिन्हें देखकर खुद भाजपा कार्यकर्ता हैरान हैं :

  • आभा महतो : जमशेदपुर की पूर्व सांसद लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। कुर्मी कोटे से उन्हें जगह तो मिली, लेकिन सवाल यह है कि क्या वह पार्टी को कोई सियासी लाभ दिला पाएंगी?
  • नीलकंठ सिंह मुंडा : आदिवासी चेहरा होने के बावजूद खूंटी में अपनी ही सीट न बचा पाने वाले मुंडा को फिर से तवज्जो देना कार्यकर्ताओं की समझ से परे है।
  • शालिनी बैसखियार : बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष रहीं शालिनी का अचानक झारखंड की राजनीति में पदार्पण और सीधे ‘मंत्री’ का पद पा लेना चर्चा का विषय बना हुआ है।

विवादित चेहरों को ‘प्रमोशन’, जुझारू नेता किनारे

सबसे चौंकाने वाला फैसला मुनेश्वर साहू को लेकर है। नगर निकाय चुनाव के दौरान गुमला में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बावजूद उन्हें मंत्री से पदोन्नत कर उपाध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं, भानु प्रताप शाही जैसे फायर ब्रांड नेता अभी भी उपाध्यक्ष पद तक ही सीमित हैं। अनंत ओझा और विरंची नारायण जैसे कद्दावर नेताओं को कमेटी से बाहर रखना रणनीति है या गुटबाजी, यह आने वाला वक्त बताएगा।

परिक्रमा से मिलता है पद!

पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि जो नेता बड़े नेताओं की ‘परिक्रमा’ करने में माहिर हैं, उनकी जगह पक्की है। जनता के बीच पैठ रखने वाले जुझारू नेताओं के बजाय ‘ड्राइंग रूम’ पॉलिटिक्स करने वालों को तवज्जो दी गई है।

निष्कर्ष : झारखंड भाजपा की यह नई कमेटी संतुलित दिखने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन अंतर्विरोधों से भरी है। यदि पार्टी ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली और केवल ‘चेहरों के हेर-फेर’ पर टिकी रही, तो आगामी चुनौतियों से निपटना उसके लिए आसान नहीं होगा। अब सबकी नजरें आगामी मंच, मोर्चा और प्रकोष्ठों के गठन पर टिकी हैं—क्या वहां युवाओं को इंसाफ मिलेगा?

Chinmay bhardwaj

Chinmay Bhardwaj is a journalist at News UDI covering local news from Garhwa and nearby areas of Jharkhand.

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