News UDI | गढ़वा : आस्था का सैलाब, गूंजते जयकारे और भक्ति में सराबोर हजारों श्रद्धालु। शनिवार (18 अप्रैल 2026) को गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के बलियारी गांव में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के उपलक्ष्य में निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया। तपती धूप भी श्रद्धालुओं के अडिग विश्वास को डिगा नहीं सकी और पूरा इलाका ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
भक्ति और भव्यता का अनूठा संगम
यज्ञ स्थल से शुरू हुई इस कलश यात्रा में 1051 महिला श्रद्धालुओं ने सिर पर कलश धारण कर हिस्सा लिया। यात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। हाथों में लहराती धर्म ध्वजाएं, ढोल-नगाड़ों की थाप और डीजे की धुन पर थिरकते भक्त जन माहौल को उत्सवपूर्ण बना रहे थे।
यात्रा का मुख्य आकर्षण सुसज्जित रथों पर विराजमान भगवान सीता-राम और राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकियां रहीं, जिन्हें देखने के लिए सड़कों के किनारे ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सोन नदी के तट पर हुआ पवित्र जलभरी अनुष्ठान
कलश यात्रा यज्ञ मंडप से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बरवाडीह स्थित सोन नदी तट पर पहुंची। यहाँ विद्वान पंडितों की टोली ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र कलशों का अभिमंत्रण किया। विधि-विधान से जल भरने के पश्चात सभी श्रद्धालु पुनः यज्ञ स्थल लौटे, जहाँ विधिवत कलशों की स्थापना की गई।
दिग्गज संतों का सानिध्य और यजमानों का समर्पण

इस महायज्ञ को आध्यात्मिक ऊंचाई देने के लिए उत्तर प्रदेश से कई प्रख्यात संत पधारे हैं। इनमें शामिल हैं :
- महामंडलेश्वर प्रेम शंकर दास
- नारायणाचार्य
- देवनारायण स्वामी
- कृष्णानंद शास्त्री
यज्ञ के सफल संचालन में महात्मा सुंदर राज अतिराज की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने स्वयं कलश यात्रा में शामिल होकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान के रूप में रामाशीष दुबे, विनोद दुबे, धर्मेंद्र कुमार दुबे सहित दुबे परिवार और अन्य गणमान्य व्यक्ति पूरी निष्ठा के साथ दायित्व निभा रहे हैं।
युवा शक्ति और समाजसेवियों का मिला साथ
यज्ञ की व्यवस्था और सफलता में क्षेत्र के युवा समाजसेवी रजनीश रंजन दुबे (विकास दुबे) और धीरज दुबे ने कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया। उनके साथ अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और यज्ञ समिति के सदस्यों ने कड़ी मेहनत कर व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखा।
धार्मिक एकता की मिसाल
बलियारी का यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एकता का प्रतीक बन गया है। कलश यात्रा के दौरान हर वर्ग और उम्र के लोग भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। यज्ञ समिति ने विश्वास जताया है कि आगामी दिनों में होने वाले प्रवचनों से क्षेत्र के लोगों को उच्च आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा।














