News UDI | गढ़वा : खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के दौरान धान अधिप्राप्ति (Paddy Procurement) प्रक्रिया में अनियमितता बरतने वालों पर गढ़वा जिला प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। उपायुक्त (DC) दिनेश कुमार यादव के सख्त रुख के बाद जिले के मझिआंव क्षेत्र में किसानों के हक से खिलवाड़ करने वाली संस्था और कर्मियों के विरुद्ध बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जन सुनवाई में खुला धांधली का कच्चा चिट्ठा
मामले का खुलासा 20 मार्च 2026 को आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान हुआ। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने उपायुक्त के समक्ष यह गंभीर आरोप लगाया कि मझिआंव फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPO) द्वारा धान खरीद में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
शिकायत के अनुसार, संस्था के अध्यक्ष द्वारा किसानों से क्रमबद्ध (Serial wise) तरीके से धान क्रय नहीं किया जा रहा था। आरोप था कि जो किसान केंद्र पर पहले से धान लेकर कतार में थे, उन्हें नजरअंदाज कर बाद में आने वाले किसानों का E-pos मशीन में अंगूठा लगवाकर धान खरीद की गई। इस प्रक्रिया ने सरकारी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
प्रशासन की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: कमीशन कटा और लाइसेंस होगा रद्द
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तत्काल संज्ञान लिया। 28 मार्च को FPO अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसे संतोषजनक नहीं पाए जाने पर प्रशासन ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं :
- आर्थिक दंड : मझिआंव फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कमीशन में 25 प्रतिशत की कटौती करने का निर्णय लिया गया है।
- लाइसेंस रद्दीकरण : उपायुक्त ने जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान को निर्देश दिया है कि संबंधित संस्था की अनुज्ञप्ति (Licence) को नियमानुसार रद्द करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करें।
- भुगतान पर रोक : जिला आपूर्ति पदाधिकारी देवानंद राम को निर्देशित किया गया है कि कमीशन की कटौती सुनिश्चित करने के बाद ही शेष राशि का भुगतान किया जाए।
लापरवाह कर्मियों पर भी गिरी गाज
प्रशासन की यह कार्रवाई केवल संस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें संलिप्त और लापरवाह अधिकारियों व कर्मियों को भी लपेटे में लिया गया है :
- कंप्यूटर ऑपरेटर बर्खास्त : केंद्र पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर नीलू कुमारी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (Terminate) कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि उन्होंने किसानों को समय पर SMS सूचना नहीं भेजी, जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया बाधित हुई।
- जनसेवक को चेतावनी : पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे जनसेवक परमानन्द प्रसाद को उनके स्पष्टीकरण के आधार पर भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी दी गई है। उन्होंने कार्य के अत्यधिक बोझ को लापरवाही का कारण बताया था।
“किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता” – उपायुक्त
जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं में बिचौलियों या नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। उपायुक्त दिनेश कुमार यादव ने कहा :
“धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाएगी।”








