News UDI | गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि खाकी की संवेदनशीलता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। डंडा थाना क्षेत्र में एक 22 वर्षीय छात्रा के साथ पिस्तौल की नोंक पर दुष्कर्म और फिर शादी का ढोंग रचकर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
घटना के 11 दिनों के लंबे इंतजार और मीडिया में मामला उछलने के बाद, बुधवार को पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया। अब न्यायालय में पीड़िता के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इस बीच पीड़िता ने पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
न्याय के बजाय थाने में ‘कैद’ और बयान बदलने का दबाव
पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद जब उसे सुरक्षा और न्याय की जरूरत थी, तब डंडा पुलिस ने उसे तीन दिनों तक थाने में बिठाए रखा। पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिसकर्मी उस पर प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय बयान बदलने का दबाव बना रहे थे। पुलिस चाहती थी कि वह यह स्वीकार कर ले कि आरोपी राहुल चौधरी के साथ उसका पिछले चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था।
क्या है रूह कंपा देने वाली पूरी घटना?
पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पनेरीबांध में रहकर पढ़ाई कर रही छात्रा ने बताया कि पड़ोस के रहने वाले राहुल चौधरी (लकड़ही टोला, बरांव गांव, थाना चैनपुर, जिला पलामू) ने पहले पिस्तौल के बल पर उसके साथ दुष्कर्म किया और शादी करने का झांसा देकर शांत करा दिया। इसके बाद पीड़िता अपने पैतृक गांव आ गई थी। 4 अप्रैल को जब पीड़िता के माता-पिता घर पर नहीं थे, तब आरोपी राहुल अपने मौसेरे बहनोई आलोक चौधरी (निवासी – ग्राम सिगसिगी, टोला लोहरदगा, थाना रेहला, जिला पलामू) के साथ मिलकर उसे अगवा कर ले गया।
- जबरन शादी का नाटक : आरोपी उसे रेहला थाना क्षेत्र के सिगसिगी गांव ले गए, जहां आरोपी की मौसेरी बहन पूजा और बहनोई आलोक की मौजूदगी में जबरन उसकी मांग भरी गई।
- नदी के पुल के नीचे सामूहिक दुष्कर्म : शादी का ढोंग करने के बाद राहुल और आलोक उसे लेकर निकले। पीड़िता के गांव के समीप रास्ते में तहले नदी के पुल के नीचे दोनों ने बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
- ग्रामीणों ने पकड़ा : नदी में मछली पकड़ रहे लोगों ने जब यह मंजर देखा तो शोर मचाया। भागने की कोशिश कर रहे राहुल और पीड़िता को ग्रामीणों ने पकड़ लिया, जबकि आलोक मौके से फरार हो गया।
पुलिस की संदिग्ध भूमिका : आरोपी को छोड़ा, पीड़िता को आश्रय गृह भेजा

सूचना मिलने पर पहुंची डंडा थाना पुलिस राहुल और पीड़िता को थाने ले गई। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उसे और उसकी मां को तीन दिन थाने में रखा, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की। पुलिस का तर्क था कि “ऊपर से आदेश है”।
हद तो तब हो गई जब पुलिस ने कथित तौर पर पीड़िता से दबाव बनाकर एक आवेदन लिखवाया और उसे गढ़वा के एक आश्रय गृह में छोड़ दिया, जबकि आरोपी राहुल चौधरी को थाने से ही रिहा कर दिया गया। पीड़िता का मोबाइल भी पुलिस के पास है, जिसे आरोपी ने तोड़ दिया था।
मीडिया के हस्तक्षेप के बाद जागी पुलिस
इस मामले में मोड़ तब आया जब 10 अप्रैल को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने हस्तक्षेप किया। इसके बावजूद पुलिस चुप रही। लेकिन 14 अप्रैल को जब रांची से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र और ‘न्यूज यूडीआई’ ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, तब जाकर पुलिस प्रशासन की नींद टूटी।
आरोपी का पलटवार : मामला और भी उलझा
हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अब दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की है। जहाँ पीड़िता ने गैंगरेप समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है, वहीं आरोपी राहुल चौधरी ने पीड़िता पर ‘पोक्सो एक्ट’ के तहत मामला दर्ज कराते हुए दावा किया है कि पीड़िता उसे नाबालिग होने के समय से झांसे में लेकर संबंध बना रही थी।
मुख्य बिंदु जो सवाल खड़े करते हैं :
- पीड़िता को तीन दिन तक थाने में क्यों रखा गया?
- गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी को शुरुआत में क्यों छोड़ दिया गया?
- मेडिकल कराने में 11 दिनों की देरी का जिम्मेदार कौन?
फिलहाल, पुलिस की कार्यशैली को लेकर इलाके में भारी आक्रोश है और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।





